नामान्तरण का 25 हजार.. फौती का 10 हजार…सीएमएचओ कर रहे भ्रष्टाचार…नरवा-घुरवा-बाड़ी केंद्र सरकार के पैसों से…आपातकाल भारतीय इतिहास का काला अध्याय…भाजपा ने प्रेस वार्ता कर लगाए गम्भीर आरोप…

भारतीय जनता पार्टी कोरिया ने आज भाजपा कार्यालय में एक प्रेसवार्ता आयोजित कर कांग्रेस कार्यकाल में  भारी भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाए हैं। पूर्व मंत्री भैया लाल राजवाड़े ने कहा कि आज गरीब किसानों की जमीन का नामांतरण करना हो तो ₹25 हजार की मांग की जाती है वहीं फौती चढ़वाना हो तो रेट  ₹10 हजार रखा गया है। पैसा नही देने पर लोगो को महीनों चक्कर कटवाया जाता है और उनका काम भी नही होता है। पूर्व मंत्री भैयालाल राजवाड़े ने यह भी कहा कि नरवा, घुरवा, बाड़ी और रोका-छेका जैसी योजनाएं शासन के पैसे का दुरुपयोग है दरअसल यह केंद्र सरकार के मनरेगा योजना के पैसे से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विधायक एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि होता है वह सभी के लिए है। उन्होंने भाजपा नेता राजेश साहू के प्रकरण की चर्चा कर कहा लेकिन स्थानीय विधायक थाने में जाकर खुद बैठकर पहले से लगी धारा में परिवर्तन करा FIR कराती हैं जो गलत है।
भाजपा जिला अध्यक्ष कृष्ण बिहारी जायसवाल ने सीएमएचओ पर भ्रष्टाचार का सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि कोविड के नाम पर जम कर आर्थिक गड़बड़ी की गई है। कोविड सेंटर में 1 लाख रुपए की दर से एसी लगाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि  सीएमएचओ को भ्रष्टाचार करने के लिए राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि सीएमएचओ मेरे साथ ही पूर्व मंत्री व पूर्व विधायकों का भी फोन नही उठाते हैं। उन्होंने प्रशासन द्वारा कलेक्ट्रेट, जिला पंचायत और हॉस्पिटल में लगने वाली लिफ्ट के भी विरोध की बात कही।
पूर्व विधायक भरतपुर-सोनहत श्रीमती चम्पा देवी पावले ने कहा कि केल्हारी के आस-पास कई महीनों में लाइट नही है। सरकार ने बिजली बिल हाफ करने की बजाए बिजली ही साफ कर दिया है।
पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष तीरथ गुप्ता ने कहा कि छग की सरकार ने राज्य के 320 मीसा बंदियों की पेंशन कर दी। सरकार केवल छत्तीसगढ़िया पर ही फोकस कर रही है। जो केवल वोट बैंक की राजनीति है।

आपात काल पर यह कहा भाजपा ने-

25 जून 1975 को तब की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा थोप दिया गया ‘आपातकाल’ इतिहास का ऐसा ही एक काला अध्याय है जिसे हमें कभी भूलना नहीं चाहिए।
आपातकाल की घोषणा होते ही स्वयंसेवकों और तमाम गैरकांग्रेसी नेताओं की गिरफ्तारी शुरू हो गयी। उन पर प्रताड़नाओं का सिलसिला सा चल पड़ा। देश भर से लाखों लोग सत्यागढ़ करके जेल गए और लाखों लोगों को गिरफ्तार किया गया। तब अभिव्यक्ति व की आज़ादी को भी कुचल दिया गया था। मीडिया पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध लगाया गया था। 25 जून 1975 की आधी रात को इमरजेंसी लगाने के तुरंत बाद अखबारों के दफ्तरों की बिजली काट दी गई, ताकि ज्यादातर अखबार अगले दिन आपातकाल का समाचार ना छाप सकें। प्रेसवार्ता के दौरान भाजपा नेता देवेंद्र तिवारी, पंकज गुप्ता व आईटी सेल प्रभारी तीरथ राजवाड़े उपस्थित रहे।
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