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पशुधन से गुलजार हुए गौठान, पाहंदा में मुकम्मल हुआ माडल गौठान का सपना, एक हजार से अधिक मवेशियों को एक ही जगह पर रखने की संकल्पना हुई मूर्त

गाय के जतन होत, देख मोला नीक लागीस: पहटिया
दक्षिणापथ, दुर्ग। पाटन विकास खण्ड के ग्राम पाहंदा के माडल गौठान में ठीक सुबह 9 बजे गांव का सारा पशु इक_ा हो जाता है। इस डे केयर सेंटर में चारा-पानी का पूरा इंतजाम है। ठीक 10 बजे पशु चिकित्सक आ जाते हैं। पहटिया मिलऊ गायों का हाल बताते हैं। टीकाकरण की व्यवस्था कर दी जाती है। बीमार पशुओं के ट्रीटमेंट का प्लान कर दिया जाता है। फिर नस्ल सुधार पर बात होती है। मिलऊ बताते हैं कि गांव का पूरा पशुधन एक साथ एक ही जगह होने पर डाक्टर साहब को भी काफी सुविधा हो जाती है। हम लोग अपने परंपरागत अनुभव भी उनसे साझा करते हैं। किस तरह से पशुधन का उपचार बेहत्तर ढंग से हो पाएगा। एक और पहटिया रामस्वरूप बताते हैं कि चारा की व्यवस्था भी हम लोग देखते हैं। गौठान समिति के समक्ष अपनी बात रखते हैं। इसके अलावा गांव में भी नियमित बैठक होती है। हम लोग माडल गौठान को आगे बढ़ाने अपनी बात रखते हैं। सरपंच श्रीमती भारती वर्मा ने बताया कि माडल गौठान पूरी तरह तैयार है। बस इसे अंतिम रूप ही देना है। सोलर पंप लग गए हैं। केंचुआ खाद बनाया जा रहा है। गोबर खाद भी तैयार हो रहा है।


उल्लेखनीय है कि पशुओं के लिए बनाया गया शेड गांव के ही बढई लोगों ने तैयार किया है। कल रात अच्छी बारिश गांव में हुई लेकिन शेड के नीचे जरा भी पानी नहीं आया। उन्होंने बताया कि पूरे गौठान में पौधे लगाए जा रहे हैं। अगले कुछ महीनों में जब पौधे बड़े हो जाएंगे तो गौठान बहुत ही सुंदर हो जाएगा। उन्होंने बताया कि बाड़ी और चारागाह के लिए भी व्यवस्था की गई है। बाड़ी के लिए कृषि विभाग से आज ही भिंडी बीज भी आया है। चारागाह के लिए नैपियर मंगवाया गया है। चरवाहा मिलऊ बताते हैं कि पशुओं के नस्ल संवर्धन से, टीकाकरण से उन्हें समय पर उपचार प्रदान करने से पशुधन की रक्षा हो सकेगी। वे 11 बजे पशुओं को चराने भी पास ही के मैदान में ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि ये सामूहिक कार्य है। गौमाता की सेवा का फल पूरे गांव को मिलेगा। गांव वाले जानते हैं कि ये पुण्य का कार्य है। गांव के विकास का कार्य है इसलिए ये पूरी तरह से सहयोग दे रहे हैं। पहटिया ने कहा कि ये गाय के जतन होत, देख मोला नीक लागीस। सरपंच श्रीमती भारती वर्मा ने बताया कि गौठान के विकास के लिए गांव वाले पूरी तरह से सजग हैं। वे बैठकों में नियमित रूप से उपस्थित होते हैं और अपने सुझाव देते हैं। उनके सुझाव के अनुरूप गौठान को चलाने के संबंध में निर्णय लिए जाते हैं।

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