
मानव जाति बुद्ध के मार्ग का अनुसरण कर किसी भी संकट का कर सकती है सामना…सरगुजा आईजी रतन लाल डांगी का विशेष लेख…
विश्व मे चाहे प्राकृतिक आपदाएं (भूकंप,बाढ़,चक्रवात, सूखा) हो या वायरस जनित महामारियां। यह सब मानव जाति के द्वारा प्रकृति प्रदत्त संसाधनों के प्रगति की लालसा मे सभी संसाधनों का बेहिसाब दोहन एवम् भौतिकतावाद का नतीजा है। यदि मानव जाति को इस धरती पर बनाए रखना है तो अतिवादी व्यवहार से बचना होगा।अति सर्वत्र वर्जयते । यानि मानव जाति को तथागत बुद्ध के मध्यम मार्ग का अनुसरण करना चाहिए ।
जैसे प्रकृति मे असंतुलन होने से विपदाएं आ जाती है वैसे ही शरीर मे किसी तत्व की कमी होने से अस्वस्थ हो जाते हैं। हमारा शरीर भी तथागत के बताएं मध्यम मार्ग से ही स्वस्थ रह सकता है। जैसे न ज्यादा खाओ न कम, न ज्यादा सोए न कम, न ज्यादा खेले न कम, न ज्यादा इलोक्ट्रोनिक गजट यूज करें न कम, वैसे ही ज्यादा मित्रता भी नुकसान करती हैं व मित्र न होना भी, वैसे व्यक्ति की डायग्नोसिस रिपोर्ट मे भी यदि स्केल के अधिकतम से अधिक या न्यूनतम से कम आए तो चिंताएं बढ़ जाती हैं लेकिन यदि रिपोर्ट अधिकतम व न्यूनतम के बीच मे आती हैं तो डाक्टर के अनुसार चिंता वाली बात नहीं होती हैं। यानि मध्यम ही उत्तम है ।
परिवार मे भी मध्यम मार्ग उपयोगी होता है जैसे बच्चों से ज्यादा लाड प्यार भी ठीक नहीं है वैसे ही बिल्कुल भी प्यार न करना भी ठीक नहीं है यानि बैलेंस जरूरी है।आपसी रिश्तों मे भी मध्यम मार्ग ही उचित है। तथागत बुद्ध के ध्यान मुद्रा को देखने से एक शांत व प्रसन्न चित्त नजर आते है जैसे एक अबोध बालक के चेहरे की मुस्कान ।
वो इहलोक की ही बात करते हैं।यानि वर्तमान की।अपना प्रकाश खुद बनने यानि अपना रास्ता खुद चुनने की सलाह देते हैं। मानव कल्याण की बात कहते है । बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय पर जोर देते हैं। वो न तो अपने आपको भगवान कहते है और न ही यह कहते है कि दुनिया मैंने बनाई। वो अपने आपको पथ प्रदर्शक कहते है।किसी भी बात तर्क की कसौटी पर कसकर ही मानो,आंख मूंद कर भेड़ चाल न चलो,उनकी नजर में न कोई भी जाति का उच्चा है और न ही कोई जाति से नीचा है। मानव समानता में विश्वास करते हैं। सबको प्रगति का अवसर देने की वकालत करते हैं। महिला व पुरूष मे कोई भेदभाव नहीं करते हैं। भिक्षु संघ मे दोनों को प्रवेश देने की इजाजत दे दिया था । वो युद्ध मे नहीं शांति मे विश्वास करते हैं।अपराधी को भी ह्रदय परिवर्तन करके सुधारने में विश्वास करते हैं।किसी भी प्रकार की हिंसा में विश्वास नहीं करते।कोरोना संकट मे लोगों ने करूणा, संवेदना से लोगों की मदद भी किया है। सब मानव जाति को एक होकर किसी भी संकट का सामना करना चाहिए ।