
रायगढ़ में शासकीय कोटवारी भूमि को बेचने का मामला उजागर, तहसीलदार ने शुरू किया कार्रवाई ……बरमकेला, सारंगढ़ सहित शहर के कई रसूखदारों के नाम कोटवारी सेवा भूमि ……क्या अब होगी कार्रवाई ?
रायगढ़।
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में कोटवारी भूमि के खरीद फरोख्त के मामले में पुसौर तहसीलदार द्वारा पड़ताल कराया गया। जांच में पाया गया कि रायगढ़ के छातामुड़ा कोटवार द्वारा शासन से मिली कोटवारी भूमि जिसे खरीदी बिक्री नहीं की जा सकती इसके बावजूद जमीन दलालों के साथ मिली भगत कर 10-10 रु के स्टाम्प पेपर पर लिख कर अवैध तरीके से बेचने का मामला सामने आया। जांच में शासकीय कोटवारी भूमि बेचने का मामला सही पाया गया मौके पर कई निर्माण कार्य भी पाया गया है।
खास बात ये है कि जिले में कोटवारी भूमि के मामले में ये एक बड़ी कार्रवाई तो की गई है किंतु शहर के कई ऐसे रसूखदारों द्वारा कोटवारी भूमि को खरीद कर कब्जे में रखा है उस पर कब कार्रवाई होगी। जिले के बरमकेला सारंगढ सहित शहर के कई लोगों द्वारा कोटवारी सेवा भूमि औने पौने दाम पर हथिया रखा है।
फिलहाल पुसौर ब्लाक में कोटवारी भूमि की खरीदी बिक्री को लेकर तहसीलदार सख्त नजर आ रही हैं दरअसल कोटवारी भूमि कोटवारों को सेवा के बदले बतौर जीवकोपार्जन हेतु शासन की ओर से सेवा भूमि के तौर पर दी जाती है। और यह भूमि शासकीय होती है इसकी खरीदी बिक्री नहीं हो सकती। इसके बाद भी छाता मुड़ा के कोटवार द्वारा कोटवारी मद की भूमि को टुकड़ो में बेच दिया गया है। कोटवार द्वारा जमीन दलालों के साथ मिलकर भूमि के 30 टुकड़े विभिन्न लोगों को महज 10 रु के स्टाम्प पेपर पर लिखापढ़ी कर बेच दी गई है।
रायगढ़ में कोटवार भूमि की अवैध खरीद फरोख्त के मामले में तहसीलदार के आदेश पर पटवारी और आर आई द्वारा मौके पर पहुंचकर मामले की जांच पड़ताल की गई, जांच में शासकीय भूमि पर मकान निर्माण होना पाया गया है। भू माफियाओ द्वारा छातामुड़ा के कोटवारी भूमि की खरीद फरोख्त इन दिनों धड़ल्ले से चल रहा है, भूमि दलालों द्वारा उक्त शासकीय भूमि को कौड़ियों के मोल खरीद कर महंगे दामों पर टुकड़े-टुकड़े में बेचने की जानकारी मिलने पर प्रशासन द्वारा संज्ञान में लेकर जांच कराया गया। जमीन दलालों द्वारा कोटवार भूमि को निजी कब्जे की भूमि बताकर क्रेताओं को गुमराह कर बेचा जाना जांच में पाया गया। उक्त शासकीय भूमि पर लगभग 30 से अधिक परिवारों ने आशियाना भी बना लिया है तहसीलदार माया अंचल ने बताया कि कोटवार भूमि के अवैध खरीद-फरोख्त के मामले में जांच के आदेश दिए गए हैं. जांच प्रतिवेदन आने के बाद अवैध कब्जा धारियों को बेदखली की कार्यवाही की जावेगी और छातामुड़ा वर्तमान में नगर पालिक निगम में शामिल हो चुका है और शहरी क्षेत्रों में कोटवार की भूमिका नहीं होती इसलिए जल्द ही छतामुड़ा के कोटवार पद को शून्य किया जायेगा और कोटवार भूमि को शासकीय मद में दर्ज की जाएगी।