
विधिक सेवा के माध्यम से जेजे एक्ट को प्रभावी बनाया जा सकता है::न्यायाधीश देवलिया…डालसा एक ब्रिज की तरह कार्य कर सकता है::डॉ चौबे…
सीसीएफ़ की 61 वी कार्यशाला आयोजित
छतरपुर/ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से जुबेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत बच्चों के सरंक्षण हेतु प्रभावी उपचार संभव है। जिला बाल कल्याण समितियां एवं जेजे बोर्ड के सदस्य इस निकाय से संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ अपने क्षेत्रों में दिलाने के लिए सक्रिय होकर कार्य करें तो बाल कल्याण गतिविधियों में ज्यादा प्रमाणिकता आ सकेगी।यह बात आज जिला जिला एवं एडिशनल जज छतरपुर श्री राजेश देवलिया ने चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन की 61 वी ई कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही।कार्यशाला की अध्यक्षता फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ राघवेंद्र शर्मा ने की तथा छतरपुर से किशोर न्याय बोर्ड सदस्य संदीप कुमार गुप्ता ने सहभागिता की।
श्री देवलिया ने बताया कि सरकार ने विधिक सेवा प्राधिकरण 1987 निर्मित कर समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को न्याय सुलभ कराने का विधिक प्रावधान किया है।उच्च न्यायालयों के अधीन देश के हर जिले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्य कर रहे है।यहां असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों,घरेलू हिंसा पीड़ित महिलाओं,नशा,तस्करी पीड़ित लोगों के साथ उन बालकों को भी निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है जो जुबेनाइल जस्टिस एक्ट की परिधि में जरूरत एवं सरंक्षण की श्रेणी में आते है।श्री देवलिया के अनुसार प्राधिकरण द्वारा सभी प्रकार की हिंसा से पीड़ित बच्चों की कानूनी मदद की जाती है।उन्होंने बताया कि हर जिले में ऐसे विशेषज्ञ पूल बनाये गए है जो संकटापन्न बालकों की हर तरह की सहायता करते हैं।इसमें मनोवैज्ञानिक,चिकित्सकीय,कैरियर से जुड़ी सहायता शामिल रहती हैं।उन्होंने बताया कि पॉक्सो के मामलों में पीड़ित बालिकाओं के लिए प्राधिकरण द्वारा राज्य निधि से प्रतिकर के अलावा चिकित्सा,रहवास एवं पोषण सबंधी सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है।कार्यशाला में जुड़े बाल अधिकार कार्यकर्ताओं से उन्होंने आग्रह किया कि वे अपने मैदानी क्षेत्रों में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के साथ नियमित रूप से सम्पर्क में रहे ताकि ऐसे जरूरतमंद बालकों के सरंक्षण एवं पुनर्वास को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके।श्री देवलिया के अनुसार प्राधिकरण द्वारा शिक्षा के अधिकार कानून के मामले में भी सक्रियता से काम किया जा रहा है।शाला त्यागी बालकों या प्रवासी मजदूरों के बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिलाने के लिए भी जागरूकतामूलक काम किये जाते है बाल कल्याण समितियों को ऐसे अभियान से जुड़कर काम करने की आवश्यकता है क्योंकि शिक्षा से वंचित बच्चे अंततः समाज में भटकाव का शिकार हो जाते हैं।श्री देवलिया ने कहा कि जिला सेवा प्राधिकरण 24 घण्टे काम करने वाला निकाय है।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ राघवेंद्र शर्मा ने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से पुनर्वास का काम बेहतर एवं प्रमाणिक ढंग से किया जा सकता है।उन्होंने बताया कि फाउंडेशन द्वारा अब हर महीने हर जिले में एक गतिविधि बालकों के हित मे संचालित की जाएगी।
कार्यशाला का संचालन करते हुए फाउंडेशन के सचिव डॉ कृपाशंकर चौबे ने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण जेजे एक्ट के क्रियान्वयन में एक सेतु की तरह काम कर सकता है ।उन्होंने कहा कि जेजे एक्ट मूलतः समाज की भागीदारी केंद्रित कानून है इसलिए जिला विधिक प्राधिकरण भी एक स्टेक होल्डर्स की तरह अपनी भूमिका निभा सकता है।उन्होंने इसके प्रावधानों के प्रति जनजागृति की आवश्यकता पर जोर दिया। आभार प्रदर्शन की रस्म डॉ अजय खेमरिया ने पूरी की।