
छत्तीसगढ़ की राजनीत और रायगढ़ का महत्व ….. वास्तविक विकास और नेताओं की लंबी फेहरिस्त …गर्म मुद्दा ये है सत्ता पक्ष के खिलाफ विपक्ष किसे मैदान में उतारता है ….अनुभव और गुणदोष चुनावी रणनीति में निपूर्ण … और कई परतों को छानने के बाद एक ही नाम …..गौतम अग्रवाल की जहां तक बात है उनके व्यवहार की तो विरोधी भी इनके कायल है
रायगढ़ ।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में रायगढ़ विधानसभा का बड़ा ही अद्वितीय महत्व रहा है,यहाँ चुनावी ऊट किस करवट बैठेगा ये किसी को नहीं पता,इसलिए यहाँ उमीदवार चुनने से पहले प्रत्याशियों व स्थितियों का टेक्निकल सर्वे करना अति आवश्यक होता है। कोई एक्शन ड्रामा फिल्म की तरह यहाँ कई रंग देखने को मिलते हैं कभी बड़ी नोक झोक,कभी षडयंत्र,कभी कड़ी मेहनत,कभी किस्मत यहाँ कुछ भी हो सकता है और इन सब में जो बाज़ी मार गया वही हीरो।
चुनावी रणनीति में यदि बात करें उमीदवार चुनने की तो अब अनुभव के साथ टेक्निक को महत्व देना समय की माँग है,इस चुनाव में जो फिलहाल का सब से गर्म मुद्दा है वो है सत्ता पक्ष के खिलाफ विपक्ष किसे मैदान में उतारता है?
पिछले चुनाव में षडयंत्र का बोल बाला था जिसके चलते भाजपा की तय जीत को हार का सामना करना पड़ा ऐसे में जनता की जिज्ञासा जितनी सत्ता पक्ष के उम्मीदवार का नाम जानने में नहीं उतनी बेसब्री से इंतज़ार विपक्ष के उम्मीदवार का नाम जानने मे है क्योकि उसे विरोधी के साथ अपनी पार्टी की आंतरिक कलह से भी निपटना होगा,अब ऐसे में सक्रिय राजनीति में जो लोग दावेदारी में हैं वो तो हैं ही साथ में एक नये चेहरे की तलाश भी चलती रहनी चाहिए जिसमें टेक्निकल राजनीति की समझ हो,व्यवहार कुशल राजनीति में सक्षम हो,साथ ही अनुभवी भी हो और यदि इन सभी गुणों का समावेश भाजपा को चाहिए तो समझ की कई परतों को छानने के बाद एक ही नाम निकल कर आता है पूर्व विधायक श्री रोशन लाल अग्रवाल के पुत्र गौतम अग्रवाल जिनका अनुभव अद्वितीय है क्योकि अपने पिता को 2013 में चुनाव जिताने में इनकी भूमिका अद्वितीय रही है,साथ ही 2018 में भाजपा कि तय जीत की रणनीति भी इन्होने ही तैयार की थी पर सर्वविदित है कि आंतरिक विरोध कि धारा ने भाजपा को भाजपा ने ही हार की तरफ मोड़ा और जीत अविश्वासनीय रूप से कोंग्रेस को मिली।ऐसे में यदि भाजपा अपने हित को समझे तो कुछ अनुभवी नामों भी उसे लिस्ट से हटाना ही होगा जिन्होंने उसे हार के दरवाज़े पर ला खड़ा किया, नये चेहरों को और जानता की माँग को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशी चुनना होगा।
चुनावी दाँव पेच में रणनीति और नेटवर्किंग की बड़ी एहमियत है और यदि इस गुण को गौतम में देखें तो इनका नेटवर्क इतना तगड़ा है कि बारिक से बारिक परेशानी की नस तक जा कर उसे सुलझा लिया जाता है चाहे परेशानी की जड़ कितनी ही दूर हो,बात यदि व्यवहार की हो तो विरोधी भी इनके कायल है।अपने पिता के अनुभव,उनकी मृत्यु के पश्चात उनका कार्यभार व कमलम की ज़िम्मेदारी,व्यवहार में नम्रता और सद्गुण और चुनावी रणनीति में निपूर्ण गौतम आज रायगढ़ विधानसभा में रोशन लाल की ही तरह ही पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ शुरू से जुड़े हुए हैं और ग्रामीणों में भी उनकी लोकप्रियता बनी हुई है निरंतर वह शहर के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपना जनसंपर्क रहते है गौतम के बारे में कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि वे हर स्तर पर उतने ही सक्रिय हैं जितना कि उनके पिता थे।
रायगढ़ विधानसभा एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें समस्याओं का अम्बार है,और चिंतन की सहीं दिशा के आभाव में समस्याएं गंभीर हो रही हैं ऐसे में पार्टी कोंग्रेस और बीजेपी दोनो को ही बहुत सतर्कता के साथ अपना प्रत्याशी चुनना होगा।हर दृष्टिकोण से सोचना होगा क्योकि नाम बड़े और दर्शन छोटे की स्थिति से अब रायगढ़ वासी त्रस्त हैं। वहीं आम व्यक्ति को सदैव यह उमीद होती है कि वह भी एक सक्षम जनप्रतिनिधि उस क्षेत्र को सुझाये जिसे शयद चुनावी नज़र से देखा न जा रहा हो।