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जननायक रामकुमार अग्रवाल की बहुप्रतीक्षित प्रतिमा का हुआ भव्य अनावरण, गांधीवादी विचारधारा पीवी राजगोपाल ने अनावरण करते हुए कही ये बात, जो आज में रहते हुए कल की सोचते हैं वही बनते हैं जननायक,

रायगढ़। आज जिले की बहुप्रतीक्षित जननायक रामकुमार अग्रवाल की प्रतिमा का भव्य अनावरण हुआ। देश के जाने माने गांधीवादी चिंतक विचारक पीवी राजगोपाल के हाथों आदमकद प्रतिमा का भव्य तरीके से अनावरण हुआ। प्रतिमा  अनावरण का साक्षी बनने हजारों की संख्या में जन सैलाब उमड़ पड़ा ।


प्रतिमा अनावरण के बाद जन सभा को संबोधित करते हुए देश के जाने माने गांधीवादी चिंतक विचारक पीवी राजगोपाल ने कहा कि रामकुमार अग्रवाल में वो क्षमता थी जो सबमे नहीं होती है वे दूर दृष्टा थे वे समझ रहे थे कि जो विकास के मायने बताए जा रहे हैं दरअसल वह विकास नहीं विनाश की ओर लेकर जा रहा है ऐसी विकास जीने का अधिकार नहीं देगी बल्कि ये विकास प्रॉफिट कमाने वाली विकास है। प्राकृतिक संपदा का दोहन कर विकास की परिकल्पना के खिलाफ उन्होंने आंदोलन किया था आंदोलन में जीत होती है या नहीं इस पर ध्यान नहीं देते बल्कि शोषण के खिलाफ संघर्ष मानते थे उन्होंने कहा कि रामकुमार अग्रवाल कहा करते थे कि संघर्ष ही एक ऐसी चीज है जो जीत की ओर अग्रेसित करती है। आंदोलन से जीत मिली या हार ये मायने नहीं रखता है।


आज जन नायक चौक में विधिवत जननायक रामकुमार अग्रवाल की प्रतिमा का भव्य अनावरण में उमड़ा जन सैलाब बता दिया है कि उनके संघर्षो को याद किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिमा तो महात्मा गांधी की भी कई जगहों पर लगी हुई हैं। हमें जरूरत इस बात की है कि आने वाले पीढ़ी उस स्थापित प्रतिमा से संघर्षो की सीख ले आने वाली पीढ़ी को संघर्ष मायने बताते हुए उनके अवदानों से अवगत कराया जाए।

मूर्ति प्रेरणा श्रोत बनते है उस प्रेरणा से हम प्रेरित हो उनके प्रेरणा से हम कुछ कर सकें दूसरे को महान बनाने से ज्यादा जरूरी है उस महान व्यक्ति से प्रेरणा लेकर काम करें । पीवी राजगोपाल ने कहा कि महात्मा गांधी की मूर्ति को देखकर आइंस्टीन ने कहा था कि आने वाले पीढ़ी ये विश्वास नही कर पायेगा की एक हड्डी मांस वाला आदमी इस धरती में रहा है आने वाले पीढ़ियों में विश्वास नहीं होगा ये विश्वास करने में दिक्कत होगी की गांधी जी यानि सत्य, ऐसा कौन होता है जो दूसरे के बारे में सोचता हो ये दिक्कत होगी लेकिन उन्हें विश्वास दिलाना होगा की उसकी अहिंसा में बड़ी ताकत है।
सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हम रामकुमार जी के साथ छत्तीसगढ़ निर्माण के समय तर्क वितर्क करते छोटे राज्य बनने से क्या होगा तो वे कहते छोटे राज्य बनने से न्याय व्यवस्था सुलभ होगी अधिकारी कर्मचारी आम जन के नजदीक आएंगे राजधानी नजदीक आएगी लोगों को न्याय मिलने में आसानी होगी। लेकिन न्याय की बात तों दूर विकास के नाम पर विनाश की प्रक्रिया शुरू हो गई इसे लेकर उनका आंदोलन शुरू हुआ। कॉरपोरेट हाउस जो तय करता वही होता है वे ऐसे विकास के विरोधी थे। इस विकास में आम आदमी कहा जाएगा इससे कोई सरोकार नहीं यह तो प्रॉफिट वाला विकास है। इस विकास से आम आदमी मजदूर बनेगा। जबकि छत्तीसगढ़ बनने को लेकर उनकी परिकल्पना कुछ और थी कि इससे विकास होगा और आम आदमी को लगेगा कि उसका काम हो रहा है जीने का अधिकार मिल रहा है लेकिन छत्तीसगढ़ बनने के बाद उस विकास की परिकल्पना कहीं खो गई।


गांव को उजाड़कर शहर की परिकल्पना और विकास जनहित में नहीं है रामकुमार अग्रवाल इस बात को समझ चुके थे वे एक दूरदृष्टि व्यक्तित्व वाले थे इस विकास से न तो जीवन जीने का अधिकार मिलेगा न अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंच पायेगा न नौकरी मिलेगी वह एक मजदूर से ज्यादा कुछ नहीं बन पाएगा। उन्होंने जिस छत्तीसगढ़ की परिकल्पना की थी आज के युवाओं खासतौर पर पढ़े लिखे युवाओं को समझना होगा और जननायक रामकुमार के अवधारणाओं को समझ उनके संघर्षो से प्रेरणा लेकर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर न्याय दिलाने का काम करना होगा।

पटरी से खिसकी हुई राजनीति को पटरी पर लाने सक्रिय राजनीति में आये लेकिन दिल समाजवादी रहा-डॉ राजू पांडे

प्रतिमा अनवारण के पश्चात सभा को सबोधित करते हुए डॉ राजू पांडे के द्वारा विस्तार के जननायक रामकुमार अग्रवाल के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद राजनीतिक व्यक्तियों द्वारा स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों को हाशियों पर डालने शुरू कर दिया। देश के लिए वे लोग निर्णय लेने लगे जिनका स्वतन्त्रता आंदोलन में कोई योगदान नहीं था कैसा हो अपना सपनों का भारत जिसका स्वतंत्रता आंदोलनकारियों ने परिकल्पना की थी उसके निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी उन्हें हाशिये पर डालते चले गए। और स्वतन्त्रता का लाभ प्रभुत्व वर्ग तक सिमट गई और मेहनतकश लोगों के लिए विकास के जिस मॉडल को संजोया गया था वह क्षीण होती चली गई।


समाज के अंतिम के लोगों को जागृत करने उन्हें देश की मुख्यधारा में लाने के लिए स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी एमएलए रामकुमार अग्रवाल समाजवाद के आदर्श को लेकर सक्रिय राजनीति में आये। राजनीति में आये जरूर लेकिन हृदय से समाजवादी रहे। पटरी से खिसकी हुई राजनीति को पटरी पर लाने का वो अंतिम समय तक प्रयास किया लेकिन वो इसमे हार गए वो उन मूल्यों को तलाशते रहे जिससे मूल्यपरक राजनीतिक हो सके। रायगढ़ वासियों के लिए तीर्थ स्थल है जहां ऐसे जननायक होते है ऐसी लोकप्रियता हर किसी राजनीतिक को नही मिलती है।


आज हम जिस सहकारिता की बात करते हैं हमने उनमें उस दौर में देखा है। उनकी सहकारिता के प्रति ललक देखते बनती थी। अपने समय से बहुत आगे देखने की अद्भुत क्षमता थी केलो बांध की परिकल्पना उन्ही की थी। डॉ राजू पांडे ने बताया कि उनके पुत्र स्व कैलाश अग्रवाल के साथ उनकी काफी मित्रता थी कैलाश भाई ने उस फाइल को भी दिखाया था जिसमे केलो डेम निर्माण को लेकर किये गए सारे दस्तावेज मौजूद थे जो मेरी कल्पना से बहुत दूर थी।
प्राकृतिक संसाधनों से भरा यह जिला इस पर उद्योगपति की गिद्ध नजर पड़ गई। वो ऐसा कालखंड था लोगों को पता नहीं था कि क्या होने वाला है लेकिन जननायक रामकुमार अग्रवाल एक दूरदृष्टि थे वो समझ चुके थे गांव उजड़ जाएंगे विकास के नाम पर विनाश होगा। इसके लिए उन्होंने संघर्ष करना शुरू किया। एक जननायक ही अपने युग से आगे देखता है यही वजह है कि आज जो स्थिति बन चुकी है उसे भांप चुके थे। उनके आंदोलन का स्वरूप ऐसा था कि अनेक युवा वर्ग उनसे जुड़ा और आज वे तीसरे पीढ़ी का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने मंच से कई युवाओं के नाम गिनाते हुए कहा कि उस समय उनके साथ जुड़कर कई आंदोलनों में सक्रियता से भाग लिया और आज वे आंदोलन के पर्याय हैं। आज की युवा पीढ़ी को अंतिम पंक्ति को लाभ दिलाने के लिए जननायक रामकुमार अग्रवाल से प्रेरणा लेकर संघर्ष करना चाहिए।

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