
एक बड़ी खबर ये रायगढ़ से ओपी के नाम आने से कांग्रेसियों की खिल जाती है बांछे …….कांग्रेसी क्यों दिल ही दिल कर रहे ये दुआ ….ओपी को ही मिले टिकट
रायगढ़। विधानसभा चुनाव के संभावित प्रत्याशियों को लेकर यूं तो भाजपा और कांग्रेस दोनों में घमासान मचा है। एक तरफ कांग्रेस जहां रायगढ़ सीट को किसी भी स्थिति में हाथ से नहीं जाने देना चाह रही है। वहीं भाजपा हर हाल में जिला मुख्यालय की इस सीट को हथियाने के फिराक में है। कहा जा रहा है कि भाजपा इस सीट के लिए तीन संभावित प्रत्याशियों के नाम में पूर्व आईएएस ओपी चौधरी को टाप पर रखा है। चर्चाओं के बाजार में यह बेहद गर्म है कि रायगढ़ से ओपी की मुहर लग सकती है और महज इस खबर से कांग्रेस की बांछे खिल जाती है। हालाकि राजनीति के जानकार इसे अप्रत्याशित मान रहे हैं।
दरअसल पिछले विधानसभा चुनाव में रायगढ़ जिले की सभी सीटों पर मिली करारी हार के बाद से भाजपा इसी उधेड़बुन में है कि इस गढ़ को कैसे फतह किया जाए। बताया जाता है कि भाजपा की पहली प्राथमिकता जिला मुख्यालय की रायगढ़ को जीतने की है। राजनीत के गर्म चर्चाओं के अनुसार 2018 के विधानसभा चुनाव में खरसिया से हार का मुंह देख चुके ओपी चौधरी को हर हाल में जीत का स्वाद चखना है लेकिन खरसिया से चुनाव न लड़ने और रायगढ़ से उम्मीदवारी की बात आलाकमान के समक्ष रखकर फंस चुके हैं। अब अगर रायगढ़ से भी चुनाव लड़ने से मना करते हैं तो संगठन में उनकी जबरदस्त किरकिरी होगी । यही वजह है की ओपी न तो उगलते पा रहे हैं और न ही निगलते पा रहे हैं। यही वजह है की शहर में भाजपा प्रत्याशी के तौर पर रायगढ़ से ओपी चौधरी के नाम की चर्चा आम हो चुकी है और इसी लिहाज से रायगढ़ से ओपी की टिकट पक्की भी मानी जा रही है। और भाजपा के हिसाब से खरसिया से महेश साहू को उम्मीदवार बनाकर जातीय समीकरण साधने की कोशिश की गई है जिसमे भाजपा संगठन के हिसाब से रायगढ़ से ओपी चौधरी फिट बैठ रहें हैं।
रायगढ़ के कांग्रेस विधायक प्रकाश नायक भी इसी वर्ग से हैं,जो पिछला चुनाव जीतने में कामयाब रहे। भाजपा को इस बात पर भी भरोसा है कि पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी और भाजपा से बागी प्रत्याशी के मिले वोट कांग्रेस प्रत्याशी के वोट से अधिक रहें हैं। ऐसी स्थिति में रायगढ़ सीट पर भाजपा इस बार अपनी जीत सुनिश्चित मान रही है। और भाजपा की इस रणनीति से कांग्रेस में खुशी की लहर है की उन्हें वाक ओवर मिल रहा है इससे उनकी बांछे खिल जा रही है। खासतौर पर विधायक प्रकाश नायक के खेमे में, शहर में हो रही चर्चाओं पर नजर डालें तो कांग्रेस भी चाह रही है कि ओपी चौधरी को रायगढ़ से मैदान में उतारा जाए। और इसका फायदा कांग्रेस को मिले, कांग्रेस के संभावित दावेदार प्रकाश नायक और उनके समर्थक मान रहे हैं कि खरसिया विधानसभा क्षेत्र से आयातित प्रत्याशी ओपी चौधरी के आने पर कांग्रेस की जीत और आसान हो जाएगी।
चर्चाओं के अनुसार ओपी चौधरी के रायगढ़ से भाजपा के प्रत्याशी होने पर कांग्रेस को आयातित प्रत्याशी का नया मुद्दा मिल जाएगा। साथ ही कांग्रेस इस बात का भी लाभ लेना चाहेगी कि रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र में बीते वर्षों में भाजपा के ओपी चौधरी की कितनी सक्रियता रही। दरअसल लोगों में आम धारणा यह होती है कि विधायक तो स्थानीय हो, और यही वजह है की कांग्रेसी खेमे में कहा जा रहा है की भाजपा को रायगढ़ से ओपी को उतार देना चाहिए। और ओपी के फाइनल के नाम मात्र चर्चा से कांग्रेसी खेमे की बांछे खिल उठती है।
ओपी के रायगढ़ सीट से भाजपा प्रत्याशी होने का कांग्रेस में बड़ी बेसब्री से इंतजार हो रहा है। यह भी माना जा रहा है कि रायगढ़ विधायक प्रकाश नायक पिछड़े वर्ग से हैं और जातीय समीकरण का लाभ स्थानीय होने की वजह से प्रकाश नायक को मिलना स्वाभाविक है। बहरहाल रायगढ़ सीट से भाजपा प्रत्याशी की घोषणा को लेकर जितनी बेसब्री भाजपा में है उससे कहीं अधिक उत्सुकता कांग्रेस में है।
अगर रायगढ़ सीट से भाजपा ओपी चौधरी को आजमाने का इरादा रखती है तो भाजपा को इस सीट के जातीय समीकरण पर भी गौर करना जरूरी लगता है। सरिया और रायगढ़ पूर्वांचल में कोलता समाज का बड़ा वोट बैंक है। भाजपा से टिकट के लिए इस समाज से लगातार दावेदारी की जा रही है, लेकिन सफलता अब तक नहीं मिली है। ओपी चौधरी के प्रत्याशी होने पर इस बड़े वोट बैंक को साधने भाजपा क्या रणनीति बनाएगी,यह भी गौर करने वाली बात होगी भले ही भाजपा साहू वोटर को साध ले, लेकिन ओड़िया भाषी वोटरों को ओपी के लिए साधना कठिन होगा क्योंकि भाजपा के अंदर ही कई स्थानीय उम्मीदवार है जिनसे ओड़िया भाषी प्रभावित हैं जो ओपी के लिए समीकरण अलग होगी। ओपी के लिए शहरी वोटरों को भी साधना जरा टेढ़ी खीर साबित होगी। फिलहाल रायगढ़ से ओपी की दावेदारी और उनके नाम पर ही मुहर लगाने की बात से ही कांग्रेसियों में खुशी की लहर दौड़ पड़ती है। अब देखना है की ओपी फंसते हैं या बचते हैं। और किसकी बांछे खिलती है और किसकी मुरझाती है।