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डॉ. राकेश शर्मा हो सकते हैं भाजपा के तुरुप का इक्का…कोरबा लोकसभा से प्रबल दावेदार…मोदी लहर में..

 

अनूप बड़ेरिया

छग में आगामी लोकसभा इलेक्शन को लेकर चुनावी हलचल की सरगर्मी अब जोर पकड़ते जा रही है। भाजपा ने विधानसभा चुनावों में नया प्रयोग करते हुए कई प्रत्याशियों की घोषणा तो 5 माह पहले ही कर दी व अप्रत्याशित रूप से नए चेहरों को मैदान में उतार कर राजनीतिक विशेषज्ञों को चौंकाते हुए शानदार जीत के साथ ही पांसा पलट दिया।

जिसके बाद अब यह अनुमान लगाया जा रहा है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व एक बार फिर लोक सभा चुनाव में भी नए चेहरों के साथ उम्मीदवारों की घोषणा काफी पहले कर सकता है।
अब बात यदि भाजपा की राजनीति में धूमकेतू की तरह उभरे भाजपा के बड़े चेहरे बन चुके डॉ. राकेश शर्मा की जाए तो उन्होंने बड़े सधे हुए राजनीतिक अंदाज में अपनी पारी की शुरुआत की। डॉ राकेश शर्मा ने धीरे-धीरे भारतीय जनता पार्टी में अपने पैर जमाते हुए सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हुए राजनीति आरंभ की। उनकी सक्रियता को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी में उन्हें जिला चिकित्सा पोस्ट का प्रमुख बना दिया। इसके बाद उन्होंने कोरबा लोकसभा से सांसद की दावेदारी जताते हुए सभी क्षेत्रों का सघन दौरा आरंभ कर दिया। राजनीतिक विशेषज्ञ बताते हैं कि डॉ राकेश शर्मा ने पूर्व से ही लोकसभा सीट से दावेदारी कर कोरबा लोकसभा सीट की सभी सातों विधानसभा क्षेत्र में धुआंधार दौरे के साथ ही बूथ स्तर पर लोगों से मेल मुलाकात कई दौर में कर चुके हैं। यही वजह है कि सब एक जुटता के साथ डॉ राकेश शर्मा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। यही वजह है कि डॉक्टर राकेश शर्मा एक कट्टर बीजेपी कार्यकर्ता के रूप में पार्टी के साथ-साथ अपनी राजनीतिक गतिविधियों को भी आगे बढ़ते रहें। ग्रामीण अंचलों में लगातार स्वास्थ्य शिविर लगाकर जहां उन्होंने बूथ स्तर पर अपनी पकड़ बनाई है। वहीं उन्होंने अपने समर्थकों की भी अच्छी खासी फौज खड़ी कर ली है। बताया जाता है कि भाजपा के बड़े नेताओं के अलावा संगठन व संघ में भी इनकी अच्छी पकड़ है। यही वजह है की जन चर्चाओं में अब डॉक्टर राकेश शर्मा का नाम बैकुंठपुर विधानसभा सीट से जोरों पर चलने लगा है। उनकी राजनीति सक्रियता और आर्थिक स्थिति को देखते हुए साफ लगता है कि वह भाजपा के लिए तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं। यदि भाजपा डॉक्टर राकेश शर्मा पर लगाती है तो एक बार भाजपा के लिए फिर स्थिति अनुकूल हो सकती है। डॉ राकेश शर्मा पहले भी कह चुके हैं की पार्टी उन्हें कोई भी जिम्मेदारी देगी और पूरी ईमानदारी के साथ उसका निर्वहन करेंगे।
कोरबा लोकसभा सीट के लिए भाजपा के प्रबल दावेदार के रूप में काफी चर्चित हो चुके डॉ. राकेश शर्मा गरीबों के इलाज और वह भी दुर्गम इलाकों में स्वयं के खर्च पर, बिना किसी लाभ के,बिना कोई शुल्क लिए आज से नही कई वर्षों से करते आ रहें हैं।
एक छोटी सी डिस्पेंसरी से लेकर शर्मा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल की यात्रा यही सिद्ध करती है। आज नि:स्वार्थ सेवा की प्रतिमूर्ति बन चुके डा राकेश शर्मा को इस सेवा भाव के लिए राजनीतिक ईर्ष्या में भी तपना व जलना पड़ा। विशेषतः राजनीति का लबादा  पहने सामंतशाही ताकतों या साफ तौर पर कहें तो कोरिया रियासत यानि बैकुंठपुर पैलेस का प्रतिरोध झेलना पड़ा। ठीक उस नदी की तरह जो अपने उद्गम स्थल पर संकरी रहती है। लेकिन निरंतर बहाव के कारण जैसे -जैसे वह आगे बढ़ती है, शै: -शै: वह चौड़ी होती जाती और लोगों को जीवन प्रदान करती हैं। डॉ शर्मा का सेवा भाव से परिपूर्ण  संघर्षमय जीवन इसे परिभाषित करता है।
डॉ राकेश शर्मा को स्व अटल बिहारी की कवितायें बेहद पसंद है।वह बताते हैं कि उनके संघर्ष के दिनों में स्व.अटल बिहारी बाजपेयी कविता “काल के कपाल पर लिखता हूं, मिटाता हूं..गीत नया गाता हूं”..इस कविता ने  न केवल मुझे निराशा से बचाया बल्कि हर दिन मुझे एक नई ऊर्जा मिलती रही। एक शिक्षक के पुत्र के रूप में और बचपन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आदर्शों ने उन्हें सेवा कार्य के लिए सदैव प्रेरित किया । डॉ राकेश शर्मा ने गरीबी से जूझ रहे मरीजों का नि:शुल्क इलाज कर उनके जीवन में  शीतलता लाने का प्रयास किया, जो आज तक अनवरत जारी  है। लोग सेवा करने की कसमें खाकर  राजनीति में आते हैं, लेकिन डा० शर्मा दशकों की निस्वार्थ सेवा की पूंजी व जनाकांक्षाओं का सम्मान करते हुए  अपनी  सेवा और  राजनीतिक विचारधारा को भारतीय जनता पार्टी के अनुरूप पाते हैं और शायद यही वजह है की वे लगातार  कोरबा संसदीय क्षेत्र से अपनी उम्मीदवारी के लिए प्रयासरत हैं।
आज शर्मा अस्पताल गरीब मरीजों के लिए नव जीवन की आस बन चुका है। वहीं दूसरी ओर डा०शर्मा अपने यहां आई प्रसूता महिलाओं व मरीजों को निःशुल्क पौधे वितरण कर प्रकृति के संरक्षण का भी कार्य कर रहे हैं। लोकसभा क्षेत्र कोरबा और अविभाजित छत्तीसगढ़ में कई ऐसे जिले और उन जिलों में गाँव हैं, जहाँ डॉ शर्मा ने लोगो को नया जीवन दिया। यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि कुछ इलाकों में जाने पर पता चलता है की डॉ. शर्मा ने जिनको नया जीवन दिया है वे इन लोगों से सत्तत  संपर्क भी बनाये हुए हैं। जन्म दिन में बकायदे गाडी लेकर,बलोगो को गाँवों से बुलवाते हैं और सम्मान के साथ उन्हें उनके गाँव में वापस भी भिजवाते हैं ।जिससे आज तक इन ग्रामीण इलाकों में इनके प्रति मरीजों का सम्मान और सम्बन्ध बना हुआ है। कोरिया जिला  मुख्यालय  बैकुंठपुर से 40 किमी दूर बचरापोंडी की मानियारो बताती है की तब सोशल मीडिया इस कदर हावी नहीं था, जब उनके पेट से 16 किलो से ज्यादा वजनी एक गोला डॉ शर्मा ने ऑपरेशन कर निकाला था। आज 4 किलो का ट्यूमर निकाले जाने पर मीडिया में ख़बरें चलनी लगती हैं। तब याने 17 साल पहले मरीज से ज़्याफ़ा जोखिम उठाकर डॉ शर्मा ने यह ऑपरेशन किया और आज उन्ही की वजह से वे जिन्दा हैं। सरकारी नौकरी करते हुए डॉ. शर्मा दम्पति नेताओं से लगातार प्रताड़ित हो एक साल में 6 बार तबादला झेले और थक कर  आखिकार सरकारी नौकरी छोड़कर बाद में  एक अस्पताल की बुनियाद डाल गरीबो के मसीहा  और अब राजनीति में एक अलग पहचान बनाई है।
भाजपा से अन्य दावेदारों में अनुराग सिंहदेव, सरोज पांडेय, देवेंद्र पांडेय, हितानंद अग्रवाल व भाजपा से मोहित हो रहे जेसीसी के अध्यक्ष अमित जोगी का नाम भी चर्चा में है। तो वहीं कांग्रेस से एक मात्र वर्तमान सांसद ज्योत्स्ना महंत का नाम लगभग तय है।

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