
गारे पेलमा सेक्टर-1 विवाद में उबाल…फर्जी जनसुनवाई के आरोपों को लेकर शांतिपूर्ण धरने पर बैठे ग्रामीणों की गिरफ्तारी…पुलिस कार्रवाई और हादसे के बाद तमनार क्षेत्र में तनाव….डंपर की चपेट में आने से ग्रामीण की मौत के बाद भड़का आक्रोश… पुलिस ग्रामीण झड़प और आगजनी
रायगढ़। जिले के तमनार ब्लॉक अंतर्गत गारे पेलमा सेक्टर-1 कोल परियोजना से जुड़े कथित फर्जी जनसुनवाई के विरोध में ग्रामीण बीते 9 दिसंबर से शांतिपूर्ण धरने पर बैठे हुए थे। सोमवार सुबह अचानक हालात उस वक्त बदल गए जब रायगढ़ पुलिस ने धरनास्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस ने धरने में शामिल करीब 50 से 60 ग्रामीणों को जबरन हिरासत में ले लिया, जिनमें सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शर्मा के भी शामिल होने की सूचना है। इस कार्रवाई से कोल ब्लॉक प्रभावित गांवों में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीण और पुलिस के साथ झड़प की भी खबर है।
इसी बीच धरनास्थल से कुछ दूरी पर खुरुसलेंगा गांव के पास एक डंपर की चपेट में आने से एक ग्रामीण की मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे की खबर फैलते ही आसपास के गांवों और धरनास्थल पर मौजूद लोगों में आक्रोश फूट पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क पर यातायात बाधित कर दिया और कुछ वाहनों पर पथराव किया, जिसके बाद आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं। इसी बीच पुलिस और ग्रामीणों के बीच जमकर झड़प की खबर है। जिसमें एक पुलिस अधिकारी के घायल होने की भी खबर है।

एक जानकारी के अनुसार स्थिति बेकाबू होते देख पुलिस को लाठीचार्ज की खबर है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक कुछ समय के लिए हालात पूरी तरह तनावपूर्ण हो गए थे। एहतियातन आसपास के थानों से अतिरिक्त बल तैनात किया गया है और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। फिलहाल इलाके में तनाव के बीच शांति बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। खुरुसलेगा के पास सड़क हादसे के बाद यहां ग्रामीणों में भयंकर आक्रोश पनप गया और यहां पुलिस और ग्रामीणों के साथ झड़प भी होने की खबर है। टी आई कमला पुसाम के साथ ग्रामीणों के साथ झड़प की खबर आ रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता राजेश त्रिपाठी का कहना है कि
सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शर्मा सहित सैकड़ों ग्रामीणों को गैर संवैधानिक तरीके से गिरफ्तार किया गया है रायगढ़ पुलिस ने उद्योगों के दबाव में आकर उद्योगों के वाहनों का उपयोग करते हुए गांधीवादी और शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे ग्रामीणों को हिरासत में लेकर यह साबित कर दिया है कि प्रशासन जनता की नहीं बल्कि उद्योगपतियों की कठपुतली बन गया है यह घटना लोकतंत्र पर कलंक है यह छत्तीसगढ़ की आत्मा पर चोट है और यह रायगढ़ की जनता का अपमान है शांतिपूर्ण विरोध को अपराध मानना लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या है यह अत्यंत शर्मनाक है और राज्य सरकार को इसका जवाब देना ही होगा।




