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शासन का नियम एक, जिलों में नियम अलग अलग..कौन कलेक्टर ईमानदार तो कौन लापरवाह ? गुलाब कमरों का तीखा सवाल…

अनूप बड़ेरिया

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्र-छात्राओं की शिक्षा व्यवस्था को सुचारू करने के उद्देश्य से शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया जाना तय हुआ। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह था कि प्रत्येक विद्यालय में आवश्यकता के अनुरूप विषयवार शिक्षक उपलब्ध रहें और विद्यार्थियों की शिक्षा बाधित न हो।

परंतु हाल ही में सामने आए कोरबा और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिलों के मामले ने इस पूरी प्रक्रिया की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दोनों ही जिलों में समान परिस्थितियों के बावजूद युक्तियुक्तकरण के आदेश अलग-अलग नियमों के तहत जारी किए गए।

इस असमानता के खिलाफ पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने कड़ा विरोध जताया और इसे प्रशासनिक लापरवाही तथा शिक्षकों के साथ अन्याय बताया।

पूर्व विधायक का आरोप : शासन की मंशा पर ग्रहण

पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने कहा कि शिक्षा विभाग की मंशा तो छात्र-छात्राओं के हितों की शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की थी, लेकिन अलग-अलग जिलों में नियमों की अलग-अलग व्याख्या करके इस प्रक्रिया को भ्रष्टाचार और अव्यवस्था की भेंट चढ़ा दिया गया।

कोरबा जिले में नियमानुसार युक्तियुक्तकरण

उन्होंने बताया कि कोरबा जिले में नियमों और निर्देशों का पालन करते हुए माध्यमिक शाला अयोध्यापुरी, कोरबा में पदस्थ 6 शिक्षकों में से तीन विज्ञान विषय के थे। नियमानुसार विज्ञान विषय के 2 शिक्षकों को अतिशेष घोषित किया गया और उनका आदेश जारी हुआ।

एमसीबी जिले में नियमों की अनदेखी

इसके विपरीत एमसीबी जिले के माध्यमिक शाला नई लेदरी में भी ठीक ऐसी ही स्थिति थी — वहाँ भी 6 शिक्षक पदस्थ थे, जिनमें 3 विज्ञान विषय के थे। लेकिन यहाँ नियमों को दरकिनार करते हुए केवल 1 विज्ञान शिक्षक को अतिशेष किया गया और उसके स्थान पर हिंदी विषय की एकमात्र शिक्षिका को अतिशेष घोषित कर दिया गया। यह न केवल नियमविहीन निर्णय था, बल्कि हिंदी विषय के छात्रों के साथ भी अन्याय प्रतीत होता है।

एक ही नियम, अलग-अलग फैसले क्यों?

श्री कमरों ने सवाल उठाया कि जब राज्य सरकार द्वारा पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियमावली जारी की गई थी और हर जिले में युक्तियुक्तकरण समिति गठित की गई थी, जिसकी अध्यक्षता जिले के कलेक्टर करते हैं, तो फिर एमसीबी जिले में नियमों की ऐसी अनदेखी क्यों हुई?

क्या एमसीबी कलेक्टर डी .राहुल वेंकट ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को खुली छूट दे रखी थी? या फिर बिना दस्तावेजों को पढ़े ही हस्ताक्षर कर दिए?

इतना बड़ा निर्णय लेने में इतनी बड़ी चूक कैसे संभव हुई? या यह जानबूझकर किया गया पक्षपात था?

जनता के मन में उठते सवाल
यह सवाल अब आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन गया है कि दोनों जिलों के कलेक्टरों में से किसने ईमानदारी से राज्य शासन के निर्देशों का पालन किया और किसने नियमों की अवहेलना करते हुए दोषपूर्ण तरीके से युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूरी की।

गुलाब कमरों ने राज्य सरकार से मांग की कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में ऐसी मनमानी को रोका जा सके और शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता व न्याय बना रहे।

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