
छत्तीसगढ़ गौरव शिक्षा रत्न पुरस्कार से प्रशांत राजवाड़े को किया गया सम्मानित..शिक्षा,ऊर्जा और समाज सेवा के समर्पित पथिक: प्रशांत की प्रेरणादायक यात्रा..
कोरिया/छत्तीसगढ़।जहाँ शिक्षा,सेवा और संघर्ष एक साथ चलते हैं,वहीं से निकलते हैं असली राष्ट्र निर्माता।”
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के एक छोटे से गांव बिशनपुर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा और सामाजिक चेतना की लौ जलाने वाले प्रशांत कुमार राजवाड़े आज युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन चुके हैं। विगत दिनों बिलासपुर में एक निजी समाचार संस्थान ने उन्हें छत्तीसगढ़ गौरव शिक्षा रत्न सम्मान से नवाजा है। उनके जीवन का हर चरण उनके दृढ़ निश्चय, मेहनत और समाज के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और मूल प्रेरणा:–
प्रशांत कुमार राजवाड़े एक शिक्षित और संस्कारी परिवार से आते हैं। उनके पिता रामफल राजवाड़े शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,सारा (बैकुंठपुर) में वाणिज्य संकाय के व्याख्याता हैं, जबकि माता प्रतिमा राजवाड़े महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यरत हैं। माता-पिता दोनों ही समाज सेवा, शिक्षा और नैतिक मूल्यों के प्रति सजग रहे हैं, जिनसे उन्हें प्रेरणा और दिशा मिली।
शैक्षिक उत्कृष्टता: तकनीकी और अकादमिक दोनों में:
प्रशांत की शिक्षा-दीक्षा प्रारंभ से ही अनुशासित और लक्ष्यपूर्ण रही है:बी.ई. (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) – CSVTU, भिलाई,एम.टेक (थर्मल इंजीनियरिंग) – RGPV, भोपाल
पीएच.डी. स्कॉलर (थर्मल इंजीनियरिंग) – MPU, भोपाल
पीजीडीसीए – CVRU, बिलासपुर
इन्होने तकनीकी शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखा,बल्कि उसे समाज में लागू करने का सतत प्रयास किया है।
शिक्षण और तकनीकी अनुभव:
प्रशांत कुमार राजवाड़े को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में लगभग 4 वर्षों का अनुभव है,सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज,अंबिकापुर व बैकुंठपुर में व्याख्याता (मैकेनिकल इंजीनियरिंग),CREDA (छत्तीसगढ़ अक्षय ऊर्जा विकास अधिकरण) रायपुर में सब-इंजीनियर (पी.सी.),शंकरा अकैडमी, बिलासपुर में पूर्व असिस्टेंट डायरेक्टर,मंत्र ट्यूटोरियल,बिलासपुर में असिस्टेंट डायरेक्टर रहे है।
इनके अनुभवों की विविधता उनकी बहुपरतीय क्षमताओं को दर्शाती है – तकनीकी,प्रशासनिक, और अकादमिक तीनों क्षेत्रों में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है।
सिविल सेवा की तैयारी: संघर्ष की मिसाल:
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग,रायपुर
द्वारा आयोजित राज्य सेवा परीक्षा में 5 बार मुख्य परीक्षा हेतु चयन हुआ है ,साथ ही 2 बार अंतिम पड़ाव इंटरव्यू (साक्षात्कार)के लिए चयनित होकर क्षेत्र को गौरवान्वित किए हैं ,उन्होंने 7 वर्षों तक सिविल सर्विसेज की कठोर तैयारी कर यह साबित किया कि एक सामान्य ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाला युवा भी बड़े सपनों को संजो सकता है। इस दौरान उन्होंने अपने ज्ञान और विवेक से न सिर्फ खुद को मांजा, बल्कि कई युवाओं का मार्गदर्शन भी किया।
समाजसेवा और राष्ट्रीय चेतना:
प्रशांत कुमार राजवाड़े का प्रमुख उद्देश्य है – “ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों में शिक्षा को प्रोत्साहन, नशा मुक्ति हेतु जागरूकता और देश की अखंडता हेतु युवाओं को प्रेरित करना।”उन्होंने कई विद्यालयों में शिक्षा जागरूकता कार्यक्रम चलाए हैं।
सरस्वती शिशु मंदिर उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय में छात्रों को नशा मुक्ति, शिक्षा के महत्व और राष्ट्रनिर्माण की दिशा में प्रोत्साहित किया है।
मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान करके शिक्षा को गौरवपूर्ण बनाने की दिशा में भी उनका प्रयास सराहनीय है।
सम्मान एवं विशिष्टताएं:
ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और समाजसेवा के लिए विशेष पहचान,कई अकादमियों और कोचिंग संस्थानों में प्रशिक्षण और मार्गदर्शन,नशा मुक्ति अभियान और सामाजिक समरसता के लिए सक्रिय सहभागिता।
प्रशांत कुमार राजवाड़े ने केवल एक शिक्षाविद् और तकनीकी विशेषज्ञ हैं, बल्कि एक ऐसे सामाजिक कार्यकर्ता हैं जो ज्ञान को सामाजिक उत्थान से जोड़ते हैं।
उनकी यात्रा हमें यह सिखाती है कि यदि उद्देश्य स्पष्ट हो,परिश्रम निरंतर हो और भावनाएं राष्ट्रहित में हों,तो कोई भी बाधा स्थायी नहीं होती। ऐसे युवा भारत को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में एक मजबूत कड़ी बनते हैं।