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पूंजीपथरा इंडस्ट्रियल पार्क में स्थापित स्व ओपी जिंदल के सपनों को नवीन जिंदल का कुत्सिक रणनीति -…… यह है आरोप इस्पात उद्योग संघ …… नवीन जिंदल पर लगाये गभीर आरोप

 

रायगढ़। जिले के पूंजीपथरा इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना यूं ही नहीं की गई थी। यहां स्व ओपी जिंदल द्वारा दूर दृष्टि को देखते हुए स्थापित कराया था ताकि जिले वसियों को भी पता चले कि उद्योग स्थापना खराबी नहीं हैं इसके अनेक फायदे भी हैं इससे जिले के व्यवसायी उद्योग जगत की तरफ आएंगे तो इससे जिले का और विकास होगा लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे और व्यापार के नए आयाम विकसित होंगे लेकिन पिछले कुछ महीनों में नवीन जिंदल द्वारा एक सोची समझी रणनीति के तहत बिजली की आपूर्ति करना बंद कर दिया। इससे पूंजीपथरा स्थित उद्योगों पर तालेबंदी की स्थितियां निर्मित कर दी गई। इसकी वजह से यहां स्थापित करीब 46 उद्योगपति देखते ही देखते रास्ते पर आ गये। अब इनके पास बचने का कोई रास्ता नहीं छोड़ा है। यह आरोप है पूंजीपथरा ओद्योगिक पार्क में स्थित इस्पात उद्योग संघ का।

दरअसल जिले में जब जिंदल समूह द्वारा उद्योग स्थापित करने के बाद एक इंडस्ट्रियल पार्क भी स्थापित किया गया था। जहां स्थानीय व्यापारियों को छोटे -छोटे उद्योग स्थापित करने के लिए बाकायदा भूखण्ड आबंटित किया गया। उद्योग चलाने के लिए महत्वपूर्ण कारक बिजली आपूर्ति के लिए भी करार किया गया। जिसमें दोनों पक्षों के बीच इस बात का भी समझौता हुवा की इंडस्ट्रियल पार्क में स्थापित होने वाले उद्योगों को बिजली बाहर से नहीं खरीद सकेंगे उन्हें बिजली की आपूर्ति जिंदल की ओट से सम्पन्न कराया गया था। समय के साथ बिजली आपूर्ति नियामक आयोग से बिजली के दर का रिवाइसड करेगा।
खास बात ये है कि इन छोटे उद्योगपतियों को इस कदर प्रताड़ित किया जा रहा है कि अपने उद्योग को ताला मारकर हमेशा के लिए यह जगह छोड़कर चले जाएं। इतना ही नहीं इस्पात उद्योग संघ पूंजीपथरा द्वारा इस मुद्दे को लेकर कई बार दिल्ली तक गए लेकिन उनसे मिलना जरूरी तक नहीं समझा।

सँइया भय कोतवाल को डर काहे का –
दरअसल अब पूंजीपथरा इंडस्ट्रियल पार्क में स्थापित इस्पात उद्योग संघ नीचे से लेकर ऊपर तक न्याय की भीख मांग चुके लेकिन अब तक सिर्फ नहीं मिला तो वह है न्याय, इससे जाहिर है कि सँइया भय कोतवाल को डर काहे का। यही वजह है कि करार के बाद और न्यायालय के आदेश का भी पालन नहीं किया जा रहा है।

ताकत के बल पर छोटे उद्योगपतियों को कुचलने का प्रयास-
इस्पात उद्योग संघ द्वारा आरोप लगाया गया है की जिंदल द्वारा अपने रसूख के ताकत के बल पर उनका दिवाला निकाल दिया है। यहां तक कि जब वे अपने अधिकारों को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू किया तो उस पर भी अपने आदमियों द्वारा आंदोलन को भी कुचलने की पूरी तरह से पूर्व सुनियोजित तरीके से कुत्सिक प्रयास किया जा रहा है।

 

जिंदल की ओर से सफाई में जारी हुई प्रेस विज्ञप्ति-
इस मामले में जिंदल की ओर से भी प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस्पात उद्योग संघ को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की गई है। जिंदल की बाते अगर सच भी है तो यह भी समझना होगा कि अगर बिजली का उत्पादन हो रहा है तो पहली प्राथमिकता पूंजीपथरा इस्पात उद्योग को प्रदाय किया जाना चाहिए। अगर छोटे उद्योग पति आरोप लगाए तो बड़े उद्योगपति को उनके आरोपो का खंडन के बजाए बिजली की आपूर्ति कैसे की जाए इस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

 

यह भी समझना होगा कि अगर इन उद्योगों को बिजली नहीं मिलती है तो ये सारे बड़े कर्ज में बुरी तरह से फंस जाएंगे और दिवालिया होने से कोई रोक नहीं पायेगा। इसी गलियारे से निकलने वाली खुसुर पुसुर पर गौर करें तो जिंदल चाहता भी यही है अन्यथा इन्हें बिजली आपूर्ति में कोई बाधा नहीं जितनी बिजली इन्हें चाहिए उतनी का उत्पादन हो भी रहा है और उत्पादित बिजली के बारे में कहा जा रहा है कि जिंदल द्वारा पूंजीपथरा स्थित उद्योगों को बिजली देने के बजाए खुले बाजार में बिजली बेचकर बिजली कमी का रोना रो रही है।

 

इस मामले में युवा नेता विभाष सिंह भी मैदान में कूद पड़े हैं उन्होंने क्षेत्र के उन नेताओं पर बिना नाम लिए कहा है कि सब मामले में कूद पड़ने वाले शेर और शेरनी आखिर इस मामले में मौन क्यों हैं। क्या उन्हें छोटे उद्योगपतियों की समस्यांए दिखाई नहीं दे रही या फिर बड़े उद्योग पति के आगे नतमस्तक हैं।

 

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