
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर 15 को होगा सम्मान समारोह, केके फिल्म्स व रायगढ़ दृष्टि के संयुक्त तत्वावधान में होगा भव्य आयोजन
रायगढ़।
केके फिल्म्स व रायगढ़ दृष्टि के संयुक्त तत्वावधान में 15 अक्टूबर को देश के पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती मनाई जाएगी। इस अवसर एक संगोष्ठी होगी, जिसमें वक्तागण डॉ. अब्दुल कलाम की जीवनी व उनके योगदान पर वक्तव्य देंगे। सम्मान समारोह होगा, जिसमें शिक्षा, सामाजिक व अन्य कार्यों में विशिष्ट योगदान व उपलब्धि के लिए विशिष्टजनों का सम्मान किया जाएगा।
केके फिल्म्स व रायगढ़ दृष्टि के डायरेक्टर कमल शर्मा ने बताया कि पिछले साल कोरोनाकाल की वजह से डॉ. कलाम साहब की जयंती ऑनलाइन मनाई गई थी, लेकिन इस साल संस्था की ओर से भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें शहर के गणमान्य नागरिक व छात्रगण शामिल होंगे। मिसाइलमैन डॉ. अब्दुल कलाम की जयंती पर संगोष्ठी के साथ सम्मान समारोह होगा, जिसमें 11 व्यक्तिगत पुरस्कार व 10 संस्थागत सम्मान शामिल हैं। समाजसेवा के साथ शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य व उपलब्धि के लिए डॉ. अब्दुल कलाम से सम्मानित किया जाएगा। इसी तरह सामाजिक संस्थाओं को भी समाज सेवा, चिकित्सा सहित अन्य क्षेत्र में कार्य के लिए सम्मानित किया जाएगा।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को धनुषकोडी, रामेश्वरम, तमिलनाडु में हुआ था और उन्होंने भौतिकी और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग का अध्ययन किया था। उनकी जयंती को विश्व छात्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। वह 2002 से 2007 तक भारत के राष्ट्रपति रहे। उन्हें 1997 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्नÓ सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की भारत में परमाणु ऊर्जा में भागीदारी ने उन्हें ‘भारत का मिसाइल मैनÓ की उपाधि दी। उनका पूरा नाम अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम था। वे इंजीनियर, वैज्ञानिक, लेखक, प्रोफेसर, राजनीतिज्ञ थे। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम वर्ष 2002 में राष्ट्रपति चुने गए थे. भारत के राष्ट्रपति बनने से पहले, उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के साथ एयरोस्पेस इंजीनियर के रूप में काम किया था। देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम, प्रक्षेपण यान और बैलिस्टिक मिसाइल प्रौद्योगिकी विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए उन्हें ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडियाÓ नाम की उपाधि दी गई।




