
महतारी वंदन योजना के पेंच: चुनाव खत्म, ई केवाईसी के लटकते तलवार
लाल दास महंत कल्ला की रिपोर्ट
कोरिया/छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई महतारी वंदन योजना एक महत्वपूर्ण पहल है,जिसका उद्देश्य राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इस योजना की घोषणा 1 मार्च 2024 को विधानसभा चुनाव से पहले की गई थी,इस योजना का लाभ लेने के लिए कई नियम व शर्ते लागू थे जैसे कि आवेदिका छत्तीसगढ़ की स्थायी निवासी होनी चाहिए,महिला का विवाहित होना आवश्यक है,आयु 21 से 49 वर्ष के बीच होनी चाहिए,आवेदिका की खुद की कृषि योग्य भूमि नहीं होनी चाहिए इन सभी शर्तों को पूरा करते हुए छत्तीसगढ़ की महिलाओं ने महतारी बंधन योजना का फॉर्म भरा और इसका लाभ लेना शुरू कर दिया,लेकिन कुछ महीनों से कई हितग्राही महिलाओं का पैसा उनके खाते में आना बंद हो गया है जिसके कारण अब महिलाएं चॉइस सेंटर में दौड़ लगाने को मजबूर है,कुछ महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है,क्योंकि उनके नाम सूची से कट गए हैं,कुछ महिलाओं को ई-केवाईसी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है,योजना के तहत मिलने वाली राशि में देरी हो रही है, जिससे महिलाओं को परेशानी हो रही है,देखा जाए तो विधानसभा चुनाव के बाद चार और चुनाव हुए है,लोकसभा चुनाव,पार्षद चुनाव,महापौर चुनाव और पंचायत चुनाव और जितने महीने चुनाव में बीते उसके कुछ महीनो बाद हितग्राहियों के खाते में महतारी वंदन का पैसा आना बंद हो गया,इस विषय पर अगर ध्यान से सोचा जाए तो महतारी वंदन योजना की घोषणा विधानसभा चुनाव से पहले की गई थी,और इसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था,लेकिन अब,जब चुनाव का समय नहीं है,तो सरकार ने ई-केवाईसी अनिवार्य कर दिया है,जिससे कई महिलाओं का पैसा आना बंद हो गया है,इस से स्पष्ट होता है कि कि सरकार की प्राथमिकता चुनाव जीतना है,न कि महिलाओं का कल्याण,चुनाव के समय महिलाओं को पैसा दिया जाता है,लेकिन चुनाव के बाद उन्हें अपात्र बना दिया जाता है,यह एक प्रकार का राजनीतिक खेल है,जिसमें महिलाओं का उपयोग केवल वोट बैंक के रूप में किया जाता है




