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धान खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था का आलम.. पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र..किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेने की मांग

अनूप बड़ेरिया

मनेन्द्रगढ़/भरतपुर।

जिला एम.सी.बी. एवं कोरिया में धान खरीदी उपार्जन केंद्रों पर किसानों को हो रही गंभीर समस्याओं को लेकर भरतपुर-सोनहत विधानसभा के पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

उन्होंने कहा है कि धान खरीदी की वर्तमान व्यवस्था किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है और यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो किसानों की आर्थिक स्थिति पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

पूर्व विधायक कमरों ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि धान खरीदी केंद्रों में प्रतिदिन धान खरीदी की लिमिट तय किए जाने के कारण किसानों की भारी भीड़ लग रही है। किसानों को टोकन प्राप्त करने के लिए 20-20 दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसका सबसे अधिक असर छोटे एवं मध्यम किसानों पर पड़ रहा है, जो सीमित संसाधनों के कारण लंबे समय तक इंतजार नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन की खरीदी सीमा समाप्त की जाए, ताकि सभी किसान समय पर अपना धान बेच सकें।

उन्होंने यह भी बताया कि सर्वर की धीमी गति और मोबाइल नेटवर्क की कमी के कारण एग्रीटेक पंजीयन पोर्टल पर किसानों का पंजीयन नहीं हो पा रहा है। कई किसान आज भी पंजीयन से वंचित हैं, जिससे वे धान बेचने में असमर्थ हैं। इस स्थिति को देखते हुए उन्होंने धान पंजीयन की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की है।

गुलाब कमरों ने सरकार के घोषणा पत्र का हवाला देते हुए कहा कि 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी का वादा किया गया था, लेकिन वास्तविकता में किसानों से केवल 16 से 17 क्विंटल प्रति एकड़ ही धान खरीदा जा रहा है। यह किसानों के साथ अन्याय है और उन्हें उनके अधिकार से वंचित किया जा रहा है।

उन्होंने यह मुद्दा भी उठाया कि वन अधिकार पट्टाधारी किसानों से धान खरीदी नहीं की जा रही है, जिससे इन किसानों को अपने पट्टे की जमीन पर उपजाए गए धान को बेचने में भारी कठिनाई हो रही है। यह स्थिति आदिवासी एवं वनवासी किसानों के हितों के खिलाफ है।

इसके साथ ही पूर्व विधायक ने समर्थन मूल्य को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि घोषणा पत्र में 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य देने की बात कही गई थी, लेकिन किसानों को वर्तमान में केवल 2369 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है, जो स्पष्ट रूप से वादाखिलाफी है।

एक और महत्वपूर्ण समस्या के रूप में उन्होंने बताया कि धान उपार्जन केंद्रों में हमाली का पैसा भी किसानों से ही वसूला जा रहा है, जबकि यह व्यवस्था सरकार या संबंधित एजेंसियों द्वारा वहन की जानी चाहिए।

पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि किसानों की इन सभी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए जाएं, ताकि धान खरीदी व्यवस्था को सुचारू बनाया जा सके और किसानों को उनका पूरा हक मिल सके।

उन्होंने कहा कि किसान पहले ही प्राकृतिक आपदाओं और बढ़ती लागत से परेशान हैं, ऐसे में खरीदी व्यवस्था की खामियां उनकी मुश्किलें और बढ़ा रही हैं।

पूर्व विधायक ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री किसानों की पीड़ा को समझते हुए शीघ्र ही ठोस निर्णय लेंगे और धान खरीदी से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करेंगे।

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