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जंगी प्रदर्शन::कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने मांगो को लेकर निकाली मशाल रैली..

अनूप बड़ेरिया

कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन जिला कोरिया द्वारा प्रांतीय आह्वान पर हड़ताल ,द्वितीय दिवस भी पूरे जोशो खरोश के साथ जारी रहा मशाल रैली प्रेमाबाग प्रांगण से प्रारंभ होकर , घड़ी चौक, एसडीएम आफिस से होते हुए वापस प्रेमाबाग पहुंची जिसमे पटवारी संघ, राजस्व निरीक्षक संघ, वन विभाग संघ,पंचायत सचिव संघ, शिक्षक फेडरेशन,लिपिक संघ,चतुर्थ वर्ग कर्मचारी संघ,स्वास्थ्य कर्मचारी संघ,कोषालय संघ,खाद्य संघ, वाहन चालक संघ,श्रम विभाग संघ,अभियंता संघ,राजपत्रित अधिकारी संघ,पशु चिकित्सा विभाग, पीएचई संघ समेत 65 विभागों के कर्मचारी अधिकारी एक जुट होकर प्रेमाबाग में आंदोलन रत है

प्रांतीय उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह , जिला संयोजक आर एस चंदे, महासचिव विश्वास भगत ने कहा कि आज कर्मचारी कार्यालय छोड़कर मशाल उठाकर चौक चौराहों पर आने को मजबूर है इसके लिए राज्य शासन पूरी तरह से जिम्मेदार है। आगे उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपने कर्मचारी 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता दे रही है।


और राज्य शासन में 55 प्रतिशत ही महंगाई भत्ता दिया जा रहा है जबकि मोदी की गारंटी में शासन ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि जैसे ही केंद्र शासन महंगाई भत्ता लागू करेगी वैसे ही तत्काल महंगाई भत्ता छत्तीसगढ़ राज्य में कर्मचारियों को देने की बात कही गई थी किंतु वादा खिलाफी कर आज तक नहीं दिया गया प्रदेश में महंगाई भत्ता हजम करने की प्रथा चल पड़ी है जिसे कर्मचारी अब बर्दास्त नहीं करेगा ,महंगाई भत्ता का एरियर्स 7 वर्षो से लंबित है जिसे अभी तक नहीं दिया गया है फेडरेशन की मांग है की महंगाई भत्तों के एरियर्स राशि जारी किया जाए,वर्तमान में छत्तीसगढ़ में कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू नहीं है जो कि कई राज्यों में लागू है जिससे इमरजेंसी इलाज आपरेशन के लिए कर्मचारी को या तो लोन लेना पड़ता है या जमीन बेचनी पड़ती है जो अत्यंत चिंताजनक स्थिति है , फेडरेशन की मांग है कि चिकित्सा सुविधा को कैसलेस किया जाए , अगली मांग में अवकाश नगदीकरण 300 करने की है जैसा मध्यप्रदेश में किया गया किंतु छत्तीसगढ़ में अवकाश नगदीकरण 250 है फेडरेशन की मांग है की अवकाश नगदीकरण 300 किया जाए , अगली मांग में प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना करने की है
उपरोक्त मांगो को लेकर कर्मचारी गण धरने बैठ गए है और मशाल जलाने को मजबूर है। कर्मचारी अपनी जायज मांगों को लेकर हड़ताल में बैठे है।

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