♦इस खबर को आगे शेयर जरूर करें ♦

बचरापोड़ी में गूंजा ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’, काले कानून के खिलाफ कांग्रेस की हुंकार…मोदी सरकार का नया कानून श्रमिक अधिकारों पर हमला–कांग्रेस

 

बैकुंठपुर कोरिया | 15 जनवरी 2026
‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत गुरुवार को पंचायत स्तरीय पदयात्रा निकाली गई, जिसकी शुरुआत ग्राम तमजीरा से बचरापोड़ी के साप्ताहिक बाजार में आयोजित विशाल आमसभा के साथ समापन हुआ। आमसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा लाए गए नए “V.B.G.RAM.G.” अधिनियम को मनरेगा को खत्म करने की सोची-समझी साजिश बताते हुए इसे श्रमिक विरोधी और काला कानून करार दिया।

जिला अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने कहा कि मोदी सरकार ने ‘सुधार’ के नाम पर लोकसभा में बिल पास कर दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना मनरेगा की वैधानिक आत्मा को समाप्त कर दिया है। यह कदम महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज, श्रम की गरिमा और गरीबों के काम के अधिकार पर सीधा प्रहार है।
अधिकार से योजना तक, मजदूरों से छीना हक
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अब तक मनरेगा संविधान के अनुच्छेद 21 से जुड़े अधिकार आधारित कानून के रूप में लागू था, जिसके तहत हर ग्रामीण परिवार को काम मांगने का वैधानिक अधिकार था और 15 दिनों के भीतर रोजगार न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य था।
लेकिन नया कानून इसे एक कंडीशनल और केंद्र-नियंत्रित प्रशासनिक योजना में बदल देता है, जिसे चलाना या बंद करना पूरी तरह सरकार की मर्जी पर निर्भर होगा।

कोषाध्यक्ष अशोक जायसवाल ने कहा कि राज्यों पर डाला गया ₹50,000 करोड़ का बोझ केंद्र सरकार ने मनरेगा में अपनी वित्तीय हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर दी है। इसके चलते राज्य सरकारों पर लगभग ₹50,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। पहले जहां केंद्र सीधे फंड जारी करता था, अब राज्यों को पहले 40 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी, तभी केंद्र का हिस्सा मिलेगा। कमजोर आर्थिक स्थिति वाले राज्यों के लिए यह असंभव है, जिससे योजना धीरे-धीरे बंद होने की स्थिति में पहुंच जाएगी।

जनपद अध्यक्ष उदय सिंह ने कहा कि काम रोकने का नया रास्ता, मजदूरों को भूखा रखने की साजिश पहले मनरेगा के तहत सरकारी आदेश से कभी काम नहीं रोका जा सकता था, लेकिन नया सिस्टम हर साल तय अवधि में जबरन रोजगार बंद करने की अनुमति देता है। फंड खत्म होने, फसल सीजन या बजट सीमा का बहाना बनाकर मजदूरों को महीनों तक काम से वंचित किया जा सकता है। 100 दिन का वादा बना जुमला
नेताओं ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार के कार्यकाल में मनरेगा का राष्ट्रीय औसत केवल 38 दिन रहा है। छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बनने के बाद 70 प्रतिशत गांवों में अघोषित रूप से मनरेगा कार्य बंद है। 100 या 125 दिन काम देने की बातें सिर्फ भ्रम फैलाने की कोशिश हैं।

बिहारी लाल राजवाड़े ने कहा राम के नाम पर भ्रम, असल में मजदूर विरोधी कानून
सभा में यह भी कहा गया कि भाजपा भगवान राम के नाम पर एक बार फिर जनता को गुमराह कर रही है। “V.B.G.RAM.G.” में कहीं भी भगवान राम से जुड़ा कोई प्रावधान नहीं है, बल्कि इसका पूरा नाम “विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)” है, जो मनरेगा की वैधानिक गारंटी को समाप्त करता है। महात्मा गांधी के नाम को हटाना, विचारों पर हमला। महात्मा गांधी का नाम हटाना सिर्फ नाम बदलना नहीं, बल्कि उनके विचारों, ग्राम स्वराज और श्रम की गरिमा को कमजोर करने का प्रयास है। यह योजना कोरोना काल जैसी आपदाओं में करोड़ों गरीब परिवारों की लाइफलाइन रही है। कांग्रेस की प्रमुख मांगें
मनरेगा को पुनः अधिकार-आधारित वैधानिक कानून का दर्जा दिया जाए न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर ₹400 प्रतिदिन की जाए, ग्राम सभाओं और पंचायतों के अधिकार बहाल किए जाएं, अघोषित रूप से बंद मनरेगा कार्य तत्काल शुरू किए जाएं

जिला अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता, पूर्व विधायक अंबिका सिंह देव, कोषाध्यक्ष अशोक जायसवाल, महामंत्री बृजवासी, जनपद अध्यक्ष उदय सिंह, तिवारी ब्लॉक अध्यक्ष बिहारी लाल राजवाड़े, हेमसागर यादव, नरेश जायसवाल, गणेश राजवाड़े विकाश श्रीवास्तव जाग्रत कुर्रे, कलावती मरकाम, फ़रोग, रामसाय सोरी, संतोष गोयन,  बसंत सिंह, एजाज़ गुड्डू, एस एन मोदी, रामकुमार यादव, कुंवर साय एवं अनेकों कांग्रेसजन पंचायत स्तर जनसंपर्क पदयात्रा और आमसभा में बड़ी संख्या में मनरेगा श्रमिक, महिला मजदूर, पंचायत प्रतिनिधि और कांग्रेस पदाधिकारी उपस्थित रहे।

व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें

Please Share This News By Pressing Whatsapp Button



स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे

जवाब जरूर दे 

[poll]

Related Articles

Back to top button
Don`t copy text!
Close