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BIG Breaking – करोड़ों के भुगतान पर सवालों के घेरे में ‘छत्तीसगढ़ संवाद’ ….एक ही एजेंसी को 12.61 करोड़ का भुगतान, क्या सूचना तंत्र बना अफसरों का चारागाह?…जब सोशल मीडिया सस्ता और प्रभावी… फिर करोड़ों खर्च करने की मजबूरी किसकी?

 

 

रायगढ़।

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत प्राप्त दस्तावेज़ों ने सरकारी सूचना एवं जनसंपर्क व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेक्टर-19, नॉर्थ ब्लॉक, अटल नगर नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद द्वारा महज एक वित्तीय वर्ष (01 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024) के भीतर Event Craft Entertainment नामक एक ही एजेंसी को 12 करोड़ 61 लाख 62 हजार 389 रुपये का भुगतान किया जाना अब सार्वजनिक बहस का विषय बन गया है।

RTI से सामने आए भुगतान विवरण के अनुसार अलग-अलग तारीखों में लाखों और करोड़ों की किश्तों में यह राशि जारी की गई। कहीं 90 लाख, कहीं 1.97 करोड़, तो कहीं 1.47 करोड़ जैसे भारी-भरकम भुगतान दर्ज हैं। सवाल यह है कि आखिर ऐसा कौन-सा प्रचार या आयोजन था, जिसके लिए एक ही एजेंसी पर सरकारी खजाने का इतना बड़ा बोझ डाला गया?
क्या सूचना तंत्र बन गया ‘पसंदीदा एजेंसियों’ का अड्डा?
जानकारों का कहना है कि यह मामला केवल भुगतान का नहीं, बल्कि नीतिगत पारदर्शिता का है। क्या टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष थी? क्या अन्य एजेंसियों को समान अवसर मिला? या फिर सूचना एवं प्रचार का पूरा तंत्र कुछ चुनिंदा एजेंसियों के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गया है?

प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि सरकारी विज्ञापन और आयोजन अब जनहित से ज्यादा अफसरों और चहेती एजेंसियों के हित साधने का माध्यम बनते जा रहे हैं।

सोशल मीडिया के दौर में करोड़ों का खर्च, जनता के पैसों से खिलवाड़?
आज के डिजिटल युग में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से बेहद कम लागत में प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सोशल मीडिया एक सशक्त और किफायती माध्यम है, तो फिर एक ही निजी एजेंसी को करोड़ों रुपये क्यों?

क्या यह राशि वास्तव में जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार में खर्च हुई, या फिर यह सरकारी खजाने से निजी एजेंसियों को उपकृत करने का तरीका बन गया?
अब जबकि RTI के जरिए यह जानकारी सामने आ चुकी है, तो जरूरी है कि सरकार और संबंधित विभाग इस पूरे भुगतान की स्वतंत्र जांच कराएं और यह स्पष्ट करें कि आखिर जनता के करोड़ों रुपये किस आधार पर और किस लाभ के लिए खर्च किए गए।
वरना यह सवाल और गहराएगा कि कहीं छत्तीसगढ़ संवाद जनसंवाद का माध्यम न होकर, करोड़ों के खेल का मंच तो नहीं बन गया है।

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