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आनन्द मार्ग विधि से अन्नप्राशन संस्कार अखण्ड कीर्तन के साथ संपन्न …शिशु के जीवन में अनुशासन, सात्त्विकता एवं मानव मूल्यों की स्थापना की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम…आचार्य ….पढ़ें पूरी खबर

 

 

 

रायगढ़।

 

विगत दिवस बिलापसुर के गीतांजलि सिटी में आनन्द मार्ग के तत्वावधान में एक शिशु का अन्नप्राशन संस्कार श्रद्धा एवं आध्यात्मिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। सर्वप्रथम बाबा नाम केवलम नाम मंत्र का 3 घण्टे का अखण्ड कीर्तन का आयोजन हुआ। तत्पश्चात आनन्द मार्ग की परंपरागत विधि के अनुसार यह संस्कार सम्पन्न कराया गया, जिसमें शिशु के शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास की मंगलकामना की गई।

संस्कार के दौरान पौरोहित्य करते हुए आनन्द मार्ग की ब्रह्मचारिणी सन्निधिआचार्या तथा गृही आचार्य शिवानन्द दानी जी ने आनन्द मार्ग विधि के अनुसार शिशु को प्रथम बार अन्न ग्रहण कराया गया तथा बच्चे का नामकरण साध्यादेव के रूप में किया गया। इस अवसर पर शिशु के माता-पिता, परिजन एवं आनन्द मार्ग के सदस्य उपस्थित रहे।

आचार्य द्वारा बताया गया कि आनन्द मार्ग में अन्नप्राशन संस्कार का विशेष महत्व है, क्योंकि यह शिशु के जीवन में अनुशासन, सात्त्विकता एवं मानव मूल्यों की स्थापना की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम होता है। इस संस्कार के माध्यम से शिशु के स्वस्थ जीवन, सद्बुद्धि एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की जाती है।

कार्यक्रम के अंत में सामूहिक प्रार्थना एवं शांति मंत्र के साथ संस्कार संपन्न हुआ। कार्यक्रम के इस अवसर पर स्थानीय बिलासपुर के अलावा रायपुर, दुर्ग, रायगढ़, कोरबा, खपरी, विष्णुपाली, टिनमिनी, सरिया तथा आसपास के क्षेत्रों से आनन्द मार्ग के अनुयायियों ने शिशु के दीर्घायु एवं कल्याण की कामना की।

समस्त श्रद्धालुओं का आयोजक करुणाकर भोय ने सपरिवार आभार व्यक्त करते हुए आगे भी इस तरह के आयोजन में उपस्थित होने निवेदन किया।

 

 

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