
कोरबा की राख संसद तक: सांसद ज्योत्सना महंत ने फ्लाई ऐश प्रदूषण पर सरकार से मांगा जवाब
अनूप बड़ेरिया
कोरबा। कोरबा जिले में फ्लाई ऐश, लेगेसी ऐश और औद्योगिक प्रदूषण से बढ़ती पर्यावरणीय समस्या का मुद्दा संसद में जोरदार तरीके से उठाया गया। कोरबा लोकसभा क्षेत्र की सांसद Jyotsna Charandas Mahant ने लोकसभा में प्रश्न उठाते हुए जिले में ताप विद्युत संयंत्रों से निकलने वाली फ्लाई ऐश के प्रबंधन, उसके दुष्प्रभाव और अब तक वसूले गए पर्यावरणीय मुआवजे की जानकारी मांगी।
सांसद महंत ने पूछा कि 100 प्रतिशत फ्लाई ऐश उपयोग के लक्ष्य को पूरा नहीं करने वाले विद्युत संयंत्रों से अब तक कितना पर्यावरणीय मुआवजा वसूला गया और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। उन्होंने विशेष रूप से कोरबा जिले के ऐश पॉन्ड में पिछले तीन वर्षों में जमा लेगेसी ऐश की मात्रा तथा उसके वैज्ञानिक निपटान की समय-सीमा के बारे में भी जानकारी मांगी।
सांसद ने कहा कि कोरबा जिले में बिजली संयंत्रों और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाली राख और प्रदूषण का असर स्थानीय पर्यावरण, जल स्रोतों, खेती और आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी पूछा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संयंत्रों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
इस पर केंद्र सरकार की ओर से पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री Kirti Vardhan Singh ने बताया कि 31 दिसंबर 2021 की अधिसूचना के अनुसार कोयला या लिग्नाइट आधारित ताप विद्युत गृहों को 100 प्रतिशत फ्लाई ऐश उपयोग करने का निर्देश दिया गया है।
उन्होंने जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2022 से 2025 तक के प्रथम तीन वर्षीय अनुपालन चक्र में फ्लाई ऐश उपयोग के लक्ष्य को लेकर किसी प्रकार का गैर-अनुपालन नहीं पाया गया है। इस कारण छत्तीसगढ़ में किसी भी ताप विद्युत संयंत्र पर पर्यावरणीय मुआवजा अधिरोपित नहीं किया गया है।
सांसद महंत ने वन क्षेत्रों और जनजातीय बस्तियों में कथित रूप से हो रही अवैध ऐश डंपिंग को रोकने के उपायों के बारे में भी सवाल उठाया और कहा कि फ्लाई ऐश की समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है।
मंत्री ने जवाब में बताया कि थर्मल पावर प्लांटों को अप्रयुक्त संचित राख यानी लेगेसी ऐश का चरणबद्ध उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं और 1 अप्रैल 2022 से अगले 10 वर्षों के भीतर इसका उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि हसदेव ताप विद्युत संयंत्र के ऐश पांड को छोड़कर कोरबा जिले के अन्य परित्यक्त ऐश पांडों को विद्युत कंपनी ने पुनः अपने नियंत्रण में ले लिया है। वर्तमान में वहां लगभग 210.64 लाख मीट्रिक टन लेगेसी ऐश संचित है।
सांसद ने फ्लाई ऐश के प्रबंधन और निगरानी के लिए ऐश ट्रैक पोर्टल के जरिए की जा रही मॉनिटरिंग की स्थिति पर भी जानकारी मांगी। इस पर बताया गया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा विकसित वेब पोर्टल पर ताप विद्युत संयंत्रों को राख उत्पादन और उसके उपयोग की मासिक जानकारी अपलोड करना अनिवार्य किया गया है।
लोकसभा में सांसद महंत ने यह मांग भी रखी कि उद्योगों से वसूले जाने वाले पर्यावरणीय जुर्माने की राशि का उपयोग पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं में किया जाए। इस पर केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि राख उपयोग अधिसूचना 2021 के तहत एकत्रित पर्यावरणीय मुआवजा राशि का उपयोग राख के सुरक्षित निपटान और राख आधारित उत्पादों पर अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।
हालांकि मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ के ताप विद्युत संयंत्रों पर अभी तक पर्यावरणीय मुआवजा अधिरोपित नहीं किया गया है, इसलिए उसके आवंटन का प्रश्न फिलहाल नहीं उठता।




