बड़ी ब्रेकिंग::💥 लॉटरी से बनी अध्यक्ष नविता शिवहरे पर लगी मुहर, हाईकोर्ट ने भी खारिज की चुनौती — 3 साल की कानूनी लड़ाई का अंत 💥
अनूप बड़ेरिया
बैकुंठपुर/कोरिया। नगर पालिका परिषद बैकुंठपुर के अध्यक्ष पद को लेकर पिछले तीन वर्षों से चल रहा कानूनी विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 10 अप्रैल 2026 को अपना फैसला सुनाते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय के निर्णय को बरकरार रखा और अपीलकर्ता कांग्रेस प्रत्याशी रहीं श्रीमती साधना जायसवाल की याचिका को निरस्त कर दिया।
दरअसल, दिसंबर 2021 में संपन्न हुए नगर पालिका चुनाव के बाद 1 जनवरी 2022 को अध्यक्ष पद का चुनाव हुआ था। इस चुनाव में कांग्रेस से श्रीमती साधना जायसवाल व भाजपा की श्रीमती नविता शिवहरे दोनों प्रत्याशियों को समान मत प्राप्त हुए थे। इसके बाद सभी पार्षदों और दोनों प्रत्याशियों की सहमति से लॉटरी के माध्यम से निर्णय लिया गया, जिसमें भाजपा की श्रीमती नविता शैलेश शिवहरे को अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया।
हालांकि, पूरी प्रक्रिया में सहमति और हस्ताक्षर देने के बावजूद पराजित कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती साधना जायसवाल ने जिला न्यायालय बैकुंठपुर में चुनाव याचिका दायर कर दी। करीब तीन वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान मतपेटी का निरीक्षण, दोनों पक्षों के साक्ष्यों का परीक्षण समेत सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। इसके बाद 7 मई 2025 को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने याचिका को खारिज कर दिया।
इसके विरुद्ध श्रीमती जायसवाल ने उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ में अपील (सीआर नंबर 149/2025) प्रस्तुत की। न्यायालय ने 23 फरवरी 2026 को सुनवाई पूरी कर निर्णय सुरक्षित रखा था, जिसे 10 अप्रैल 2026 को सुनाते हुए अपील को भी खारिज कर दिया गया।
न्याय की जीत, बढ़ा भरोसा
न्यायालय के इस फैसले को आमजन के बीच निष्पक्ष न्याय की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। इस निर्णय से न्यायपालिका के प्रति लोगों की आस्था और मजबूत हुई है।
कानूनी पक्ष की मजबूत पैरवी
इस पूरे प्रकरण में वरिष्ठ अधिवक्ता श्री आशीष गुप्ता ने प्रभावी पैरवी की, वहीं उच्च न्यायालय बिलासपुर में अधिवक्ता सर्वश्री चंद्रेश श्रीवास्तव एवं शशांक गुप्ता ने पक्ष को मजबूती से रखा।
“सत्यमेव जयते, यतो धर्म ततो जय”
अंततः सत्य और न्याय की जीत हुई, और लॉटरी से बनी अध्यक्ष की वैधता पर न्यायालय ने अंतिम मुहर लगा दी।




