
युक्तिकरण के बहाने प्रदेश के सरकारी स्कूलों की दुर्गति करने पर आमादा प्रदेश की विष्णु सरकार – सलीम नियरिया …डॉक्टर रमन सिंह की सरकार के सेट अप को खत्म कर दिया यह कैसा सुशासन …
रायगढ़।
छत्तीसगढ़ सूबे के मुखिया ने प्रदेश की 10463 सरकारी स्कूलों के युक्ति युक्त करण का तुगलकी फरमान जारी कर दिया है। और अब साथ ही इस फैसले के विरुद्ध पनपते जन आक्रोश से घबरा कर स्कूल शिक्षा विभाग के मार्फत स्पष्टीकरण दिया है कि केवल 166 स्कूल ही बंद किए जाएंगे और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया जाएगा। नेता प्रतिपक्ष सलीम नियरिया ने कहा कि इस प्रकार के स्पष्टीकरण की आवश्यकता अचानक क्यों आन पड़ी?
दरअसल सरकार को बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि पहले फरमान के जारी होते ही इतना जन आक्रोश का सामना करना पड़ेगा दूसरे तमाम शिक्षक संगठनों की एकजुटता और वृहत आंदोलन की चेतावनी ने इनके सारे कस बल ढीले कर दिए और मजबूरी में स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा है। लेकिन यह स्पष्टीकरण फर्जी सुशासन की सरकार का मात्र एक हथकंडा है जिसके माध्यम से जनता की आंखों में धूल झोंकने का काम किया गया है । हकीकत अभी भी वही है कि 10463 स्कूलों के युक्तियुक्तकरण किया जाना है ।
ऐसा करके विष्णु सरकार ने अपने ही पूर्व मुख्यमंत्री डॉ . रमन सिंह की सरकार द्वारा सन् 2008 में किये गए युक्तियुक्तकरण के सेटअप को ख़त्म कर दिया है।जिसमें प्राइमरी स्कूल में प्रत्येक 60 स्टूडेंट्स की संख्या पर एक हेड मास्टर और दो शिक्षक तथा मिडिल स्कूल में 105 स्टूडेंट्स की संख्या पर एक हेडमास्टर और चार शिक्षक होते थे। लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत प्राइमरी और मिडिल दोनों स्तर पर एक – एक शिक्षक को कम कर दिया गया है । चूंकि प्रदेश में 45 हजार के करीब प्राथमिक और मिडिल स्कूल है। ऐस में नए सेटअप के तहत 45 हजार शिक्षक के पद ख़त्म हो जाएंगे और साथ ही जिन स्कूल में कम स्टुडेंट्स है, उस स्कूल को दूसरे स्कूल में मर्ज करने से प्रदेश में 4000 से ज्यादा स्कूल बंद हो जाएंगे मतलब सरकार का सिर्फ 166 स्कूल बंद करने का दावा पूर्णतः खोखला है।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश की यह निकम्मी सरकार अपनी कार्य हीनता को छुपाने के लिए हजारों बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है क्योंकि शिक्षकों की पर्याप्त संख्या ना होने पर हजारों की संख्या में स्टूडेंट्स स्कूलों से पलायन कर जाएंगे।
विगत सन् 2008 के युक्तियुक्त करण के पश्चात भी एक बार के लिए ग्रामीण स्तर पर स्कूलों में स्टूडेंट्स की संख्या में एकदम से गिरावट आई थी जिससे निपटने में कई वर्ष लग गए। बड़ी मुश्किल से शिक्षा की गाड़ी पटरी पर लौटी ही थी कि तथाकथित डबल इंजन की सरकार में सरपट दौड़ाने के बजाय नौसिखिया ड्राईवर ने बड़ी शिद्दत के साथ पुनः बे पटरी कर दिया है।