
बरौद खुली खदान के प्रभावितों का अनिश्चित कालीन हड़ताल शुरू ……. बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद …. मांग है विस्थापन में न्याय ….एसईसीएल पर भेदभाव का आरोप …..
रायगढ़ । एसईसीएल के बारौद खुली खदान के प्रभावितों द्वारा अपनी मांगो को लेकर आज से खदान के गेट के सामने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया गया। आज सुबह से बड़ी संख्या में प्रभावित गांव के ग्रामीण खदान पहुंचकर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। प्रभावित ग्रामीण एसईसीएल पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए विस्थापन में न्याय की मांग की जा रही है।
एसईसीएल बरौद ओपन कोल माइंस के प्रभावित पूर्व में भी अपनी मांगो को लेकर अनिश्चित कालीन हड़ताल कर चुके हैं। ग्रामीण एसईसीएल पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहते हैं कि एसईसीएल प्रबंधन कहता कुछ और है और करता कुछ और है।
बरौद माइंस के प्रभावित एसईसीएल द्वारा पुनर्वास के तहत प्रदाय की जाने वाली राशि से नाखुश हैं।

प्रभावितों का आरोप है कि इतनी कम राशि से मौजूदा दौर में क्या होने वाला है। यदि वे अपनी भूमि पर कृषि कार्य करते तो आजीवन इससे उनका और उनके परिवार का जीवकोपार्जन चलता। जब ग्रामीण देश विकास के लिए अपनी कीमती भूमि एसईसीएल को दे सकते हैं तो एसईसीएल उनके साथ न्याय संगत व्यवहार क्यों नहीं कर सकता है।
बरौद ओपन माइंस के प्रभावितों द्वारा गुरुवार से खदान के मुख्य गेट के सामने अनिश्चित कालीन हड़ताल पर बैठ गए है। ग्रामीण खदान की मुख्य गेट के सामने अनिश्चित कालीन हड़ताल पर बैठ गए है और विस्थापन में लाभ बढ़ाने की मांग को लेकर ग्रामीणों का आगे आंदोलन उग्र रूप भी धारण कर सकता है। ग्रामीण अपनी मांगो को लेकर आर्थिक नाकेबंदी करने को भी बाध्य होंगे। ग्रामीणों का आरोप है कि एसईसीएल के अन्य जगहों के प्रभावितों को अलग लाभ दिया जा रहा है और हम बरौद के प्रभावितों को नाममात्र का लाभ दिया जा रहा है जो एसईसीएल की दोहरी नीति परिलक्षित होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि एसईसीएल के दीपिका परियोजना एवं अन्य परियोजनाओं में बसाहट के लिए विस्थापित परिवारों का विस्थापन लाभ 03 लाख था जिसें एसईसीएल द्वारा संसोधित कर 10 लाख रूपया से अधिक निर्धारित किया गया है तथा सम्पूर्ण ग्राम के समस्त पात्र भू-विस्थापित एसईसीएल द्वारा आबंटित भूमि /भू खण्ड पर नही जाते है तो 5 लाख अतिरिक्त पारितोषिक/प्रोत्साहन राशि का नियम लागू किया गया है ।
वहीं बरौद विस्थापित परिवारों को भी बसाहट पुर्नवास राशि 10 लाख रूपया तथा बरौद विस्थापित परिवार भी एसईसीएस के भूमि /भू -खण्ड पर नही जाना चाहते है पारितोषिक /प्रोत्साहन राशि के रूप में अतिरिक्त 5 लाख प्रदान किये जाने की मांग की जा रही है। इसे लेकर प्रभावितों का अनिश्चित कालीन हड़ताल शुरू हो गई है।
वही ग्रामीणों में इस बात का भी आक्रोश व्याप्त है कि शासन प्रशासन को इस बाबत ध्यान आकृष्ट कराने के बाद भी उनके साथ कोई संवाद स्थापित नहीं किया गया और न ही हड़ताल के दौरान कोई हमसे बात करने आया।