
यहां मुद्दे हैं गायब चेहरे पर लड़े जा रहे चुनाव …..यहां हाथियों और मानव द्वंद के साथ कोयला खादान है प्रमुख मुद्दे …लैलूंगा और धरमजयगढ़ विधान सभा में भाजपा का पेंच …. लालजीत की प्रतिष्ठा लगी दांव पर …. सुनीति सत्यानंद और विद्यावती के बीच चेहरा दांव पर
शमशाद अहमद
रायगढ़ । जिले का धरमजयगढ़ और लैलूंगा विधान सभा से मुद्दों की जगह चेहरों पर चुनाव लड़े जा रहे हैं। धरमजयगढ़ विधान सभा क्षेत्र एक आदिवासी बाहुल्य बेल्ट है यहां आदिवासी विकास और समुचित संसाधनों से वंचित है। एसईसीएल खादान प्रभावित आज भी दरदर भटकने को मजबूर है न ही समुचित मुआवजा मिला और न पुनर्वास का लाभ मिल पाया। सड़क बिजली पानी स्वास्थ्य सुविधा जैसी अन्य बुनियादी सुविधाओ से ग्रामीण वंचित रहे जिस पर वर्तमान विधायक ने न कभी सुध लिया और न ही इस दिशा में कोई प्रयास किया।
लैलूंगा विधान सभा की बात करें तो इस विधान सभा का तमनार ब्लॉक एक ऐसा ब्लॉक है जहां कोयला खदान के नाम पर जमीनों की लूट खसोट मची हुई है। प्रभावित ग्रामीण और कोयला खदान नहीं खुलने देना चाहते हैं किंतु जनप्रतिनिधियों का इस मुद्दे पर हमेशा ही ग्रामीणों के साथ असहयोगात्मक रवैया रहा है। कोल ब्लॉक विरोध को लेकर ग्रामीणों के समर्थन में कभी कोई जनप्रतिनिधि सामने आने से हमेशा कतराता रहा है। लैलूंगा विधान सभा क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा आज भी बुनियादी ढांचे के अभाव में जुझ रहा है।
लैलूंगा विधान सभा से सुनीति राठिया और स्त्यानंद राठिया दोनो विधायक रह चुके हैं। और इस बार फिर से सुनीति राठिया को प्रत्याशी बनाया गया है। वहीं कांग्रेस की ओर से विद्यावती सिदार को प्रत्याशी बनाया गया है। यहां भाजपा प्रत्याशी की अपेक्षा कांग्रेस प्रत्याशी को एक डमी कंडीडेट माना जा रहा है। सुनीति सत्यानंद दंपत्ति क्षेत्र के घाघ नेताओं में शुमार है किंतु मुद्दों से दूर यहां चेहरों पर हमेशा चुनाव लड़े जाते हैं। लैलूंगा विधान सभा उद्योग खदान बाहुल्य क्षेत्र में आता है और प्रभावित ग्रामीणों के समर्थन में कभी कोई जनप्रतिनिधि सामने आने में बजाय पर्दे में रहना ज्यादा मुनासिब समझता है।
धरमजयगढ़ विधान सभा में हाथी और मानव द्वंद के अलावा बुनियादी समस्या एक बड़ी समस्या है परंतु यहां के दिग्गज कांग्रेस नेता विधायक लालजीत राठिया का रसूख बोलता है कोई भी कांग्रेसी नेता अब तक लालजीत के आगे टिक नहीं पाता है किसी अन्य पार्टी की बात दूर है । भाजपा यहां कमजोर है और प्रत्याशी हरिश्चंद्र राठिया भले ही यहां के विकास के मुद्दे पर बोल रहे हैं किंतु यह सब भी महज राजनीतिक औपचारिकता है। कोयला खदान प्रभावित आज भी आपनी मांगों को लेकर पीड़ित हैं वर्तमान विधायक का सपोर्ट भी महज खाना पूर्ति रहा है।
लैलूंगा में सुनीति और स्त्यानंद राठिया दंपत्ति का बोलबाला है। किंतु यह भी देखना होगा की इनके पूर्व के कार्यकाल के दौरान लोगों में उनके लिए नाराजगी साफ तौर पर देखा गया था जिसकी वजह से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था एक बार फिर से भाजपा ने सुनीति सत्यानंद राठिया पर दांव लगाया है। खास बात ये है की क्षेत्र आदिवासी समुदाय की बहुलता है और इसी से हार जीत का पैमाना बदलता है।
तमनार क्षेत्र भी इस समीकरण के हिसाब से काफी अहम मायने रखता है। कांग्रेस प्रत्याशी को भाजपा प्रत्याशी के पूर्व के कार्यकाल के दौरान जनता की नाराजगी का फायदा हो सकता है। लैलूंगा में भाजपा पूरी शिद्दत से लगी हुई है किंतु यहां विद्यावती अकेले दिखाई पड़ रही है। और यहां से मुख्य मुद्दा गायब हो चुका है यहां सिर्फ दो प्रत्याशियों के चेहरे पर चुनाव लडा जा रहा है। तमनार में यदि मुद्दे हावी हो जाए तो प्रत्याशी खास तौर पर सुनीति राठिया के लिए डगर बेहद कठिन हो जायेगा।
विद्यावती सिदार को कांग्रेस का सपोर्ट भी महज नाम का है वे अकेले ही मोर्चा संभाले हुए हैं। यहां सुनीति सत्यानंद दंपत्ति की घेराबंदी के बीच विद्यावती असहाय महसूस करें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। ठीक इसी तरह धरमजयगढ़ विधान सभा में लालजीत राठिया के आगे हरिश्चंद्र का निकलना जरा मुश्किल काम है। फिर भी हरिश्चंद्र राठिया क्षेत्र के विकास के मुद्दे पर मैदान में डट कर मुकाबला कर रहे हैं। धरमजयगढ़ में यदि भाजपा प्रत्याशी मुद्दों के आधार पर हावी हो गए तो लालजीत राठिया के माथे पर पसीना आ जाना भी तय है।