
CSIDC भूमि आबंटन पर सियासी घमासान तेज…. NR इस्पात परियोजना में संदिग्ध निवेश की कानाफूसी तेज ….. कोयला घोटाले की परछाईं… विधानसभा में गूंजा मामला …कांग्रेस भी भुनाने में लगी लेकिन ….
रायगढ़।
CSIDC द्वारा NR इस्पात को दी गई औद्योगिक भूमि अब एक बार फिर विवादों के घेरे में है। यह मामला अब केवल नियमों और प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें कथित तौर पर छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाले से जुड़े धन के निवेश की आशंका भी सामने आने लगी है। भाजपा के भीतर यह सवाल तेजी से उभर रहा है कि NR इस्पात परियोजना में लगाए गए पूंजीगत निवेश का वास्तविक स्रोत क्या है।
इसी संदेह को आधार बनाकर भाजपा विधायक पुरंदर मिश्र ने विधानसभा में प्रश्न प्रस्तुत कर CSIDC द्वारा किए गए भूमि आबंटन, उद्योग से हुए MOU, भूमि के मूल्य निर्धारण और दी गई विशेष रियायतों की विस्तृत जानकारी मांगी है। भाजपा का कहना है कि जिस तरह NR इस्पात को अल्प समय में सभी प्रशासनिक मंजूरियां दी गईं, वह सामान्य औद्योगिक प्रक्रियाओं से बिल्कुल अलग प्रतीत होती हैं।
सत्ता परिवर्तन के बाद तेज हुई प्रक्रिया, उठे सवाल
भाजपा नेताओं का दावा है कि वर्ष 2018 में कांग्रेस सरकार के गठन के बाद NR इस्पात और शासन-प्रशासन के बीच असामान्य सक्रियता देखने को मिली। उद्योग को निवेश प्रस्ताव से लेकर जमीन आवंटन तक की प्रक्रिया बेहद कम समय में पूरी कर दी गई, जबकि सामान्य परिस्थितियों में यही प्रक्रियाएं वर्षों तक लंबित रहती हैं।
इस तेजी को लेकर अब तीन प्रमुख सवाल उठाए जा रहे हैं—
क्या CSIDC भूमि आबंटन में निर्धारित नियमों की अनदेखी की गई?
क्या जमीन का मूल्य निर्धारण सरकार के हितों के विपरीत किया गया?
और क्या इस प्रोजेक्ट में कोयला घोटाले से जुड़े धन का उपयोग हुआ?
राजनीतिक गलियारों में हलचल
इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि अभी तक किसी जांच एजेंसी ने कोयला घोटाले से सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन संदेह के घेरे में आई इस परियोजना ने प्रशासनिक हलकों में बेचैनी जरूर बढ़ा दी है।
सरकार के संकेत: जांच से नहीं बचेगा मामला
भाजपा सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यदि विभागीय जवाबों में प्रक्रियागत लापरवाही या नियमों से हटकर उद्योग को लाभ पहुंचाने के तथ्य सामने आते हैं, तो इस पूरे प्रकरण की गहन जांच की जाएगी। बताया जा रहा है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल में हुए औद्योगिक MOU और CSIDC भूमि आबंटन से जुड़ी फाइलों की समीक्षा की तैयारी शुरू हो चुकी है।
कांग्रेस पर पलट सकता है दबाव
वर्तमान में कांग्रेस जल, जंगल और जमीन के मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। लेकिन यदि NR इस्पात जैसे औद्योगिक मामलों में कांग्रेस शासनकाल की अनियमितताएं उजागर होती हैं, तो यही मुद्दा कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से उलटा पड़ सकता है।
फिलहाल, NR इस्पात–CSIDC भूमि विवाद ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। विधानसभा में उठे सवालों के बाद अब सभी की नजरें सरकारी विभागों के जवाब और संभावित जांच कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।




