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जिंदल प्रबंधन पर प्रशासन का सख्त रुख …. ऐश डाइक से उड़ती राख पर कार्रवाई…. किसानों के नुकसान और जनस्वास्थ्य से समझौता नहीं …

 

रायगढ़।
जिले के तमनार क्षेत्र में स्थित जिंदल पॉवर लिमिटेड के थर्मल पावर प्लांट की ऐश डाइक से राख उड़कर आसपास के गांवों में फैलने की शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। ग्रामीणों की सेहत, खेती और पर्यावरण पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी औद्योगिक इकाई की मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बता दें कि बीते दिवस फ्लाई एश की पाइप फटने से भारी मात्रा में फ्लाई एश बहकर किसानों के खेतों तक भी पहुंच गया जिससे किसानों की खेतों में चारों ओर फ्लाई एश ही नजर आ रहा है। ग्रामीण इस मामले में प्रबंधन के खिलाफ सख्त और कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


ग्राम कुंजेमुरा में जांच, उद्योग प्रबंधन को फटकार
शिकायत मिलते ही कलेक्टर के निर्देश पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, रायगढ़ की टीम ने ग्राम कुंजेमुरा पहुंचकर स्थल निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान ऐश डाइक की स्थिति, राखड़ प्रबंधन व्यवस्था, जल छिड़काव प्रणाली तथा आसपास के पर्यावरणीय प्रभावों का गहन परीक्षण किया गया।

स्थानीय ग्रामीणों और किसानों से चर्चा के दौरान फसलों को हो रहे नुकसान, घरों में जमा हो रही राख और सांस संबंधी परेशानियों की शिकायतें सामने आईं। टीम ने प्राथमिक जांच में राख उड़ने की शिकायत को गंभीर मानते हुए उद्योग प्रबंधन को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।
सख्त निर्देश और वैधानिक कार्रवाई की तैयारी
प्रशासन ने ऐश डाइक के समुचित संधारण, नियमित जल छिड़काव, हरित पट्टी विकास, धूल नियंत्रण प्रणाली को प्रभावी बनाने और पर्यावरणीय मानकों के पूर्ण पालन के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन पाया गया तो नियमानुसार वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, प्रबंधन की लापरवाही के कारण यदि किसानों की फसल या ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर प्रमाणित होता है, तो क्षतिपूर्ति और दंडात्मक कार्रवाई भी संभव है।

मनमानी पर लगाम कसने की तैयारी
लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जिंदल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर अब कड़ी निगरानी रखी जाएगी। पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के मुद्दे पर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
अधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन अनिवार्य है। यदि उद्योग प्रबंधन ने सुधारात्मक कदमों में लापरवाही दिखाई तो कड़ी कार्रवाई तय है।
प्रशासन ने यह भी कहा कि आगे भी सतत निरीक्षण और मॉनिटरिंग जारी रहेगी, ताकि ग्रामीणों को राहत मिले और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

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