छग में कोरोना की शुरुआत 18 मार्च से…एम्स में कोविड-19 वार्ड के 100 दिन…360 रोगी ठीक हुए…54512 सैंपल टेस्ट..

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर में कोविड-19 का पहला रोगी 18 मार्च, 2020 को आने के 100 दिन बाद अब तक 360 रोगियों को स्वस्थ करके दोबारा नई शुरूआत करने के लिए काउंसलिंग दी जा चुकी है। 100 दिन के इन संघर्षपूर्ण दिवसों में एम्स ने 54512 सैंपल की जांच की और 1109 सैंपल को पॉजीटिव पाया। वर्तमान में एम्स 160 कोविड-19 रोगियों के साथ इस संघर्ष को निर्णायक मोड़ तक ले जाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
निदेशक प्रो. (डॉ.) नितिन एम. नागरकर ने बताया कि इस साल 18 मार्च को लंदन से लौटी एक छात्रा के पॉजीटिव पाए जाने के तुरंत बाद उन्हें एम्स के कोविड-19 वार्ड में एडमिट किया गया था। सी-ब्लॉक में बने इस आइसोलेशन वार्ड में पहली रोगी को पूरा उपचार प्रदान किया गया। इसके बाद आयुष में लगभग 100 बैड का पृथक कोविड-19 वार्ड बनाया गया। इसमें बढ़ते रोगियों को नियमित उपचार प्रदान किया गया। बाद में रोगियों की संख्या और अधिक होने के बाद उन्हें सी ब्लॉक में भी उपचार प्रदान करने की सुविधा प्रदान की गई। 25 जून तक एम्स के आयुष भवन और सी-ब्लॉक में 160 रोगी और 5 संदिग्ध रोगी कोविड-19 का उपचार प्राप्त कर रहे थे।
प्रो. नागरकर ने बताया कि एम्स में गंभीर कोविड-19 रोगियों को उपचार प्रदान किया जा रहा है जिसमें बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, बच्चे और किसी अन्य गंभीर बीमारी के साथ कोविड-19 से ग्रस्त रोगी प्रमुख हैं। इसके बाद भी एम्स में रिकवरी रेट उत्साहवर्द्धक बना हुआ है। अभी तक 34 बुजुर्ग, 193 गर्भवती महिलाएं और 91 बच्चों को कोविड-19 का उपचार प्रदान किया जा चुका है। नौ रोगियों की मृत्यु हुई है जिसमें सभी कोमोर्बिडीटी के थे। इनमें कैंसर, टीबी और एचआईवी जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त रोगी शामिल थे।
कोविड-19 के सैंपल की जांच के लिए भी एम्स ने निरंतर प्रयास किए और माइक्रोबायोलॉजी विभाग की वीआरडी लैब की क्षमता को निरंतर बढ़ाया। रोगियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एम्स ने आरएनए एक्स्ट्रेशन मशीन और एक अतिरिक्त आरटी-पीसीआर मशीन की व्यवस्था की। ये दोनों मशीनें अत्याधुनिक हैं और कोविड-19 के सैंपल टेस्ट तेजी से करने में काफी मददगार होंगी। 25 जून तक यहां 54512 सैंपल की जांच की गई। इसमें 1109 पॉजीटिव पाए गए। वर्तमान में यहां औसतन 1000 सैंपल टेस्ट किए जा रहे हैं।
प्रो. नागरकर का कहना है कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, राज्य सरकार के निरंतर सहयोग और आईसीएमआर की ट्रेनिंग और प्रोटोकॉल की मदद से एम्स रायपुर कोविड-19 की चुनौती का मुकाबला करने में सक्षम हो सका। 100 दिन की इस यात्रा में टेस्टिंग किट और पीपीई किट जैसे महत्वपूर्ण किट्स की उपलब्धता निरंतर बनी रही। उन्होंने इसके लिए तीनों को धन्यवाद भी दिया। उन्होंने कहा कि 700 से अधिक चिकित्सकों और नर्सिंग स्टॉफ को कोविड-19 के इलाज की प्रक्रिया की ट्रेनिंग दी गई।
अन्य रोगियों को नियमित उपचार भी दिया
कोविड-19 की चुनौती का मुकाबला करने के साथ ही एम्स रायपुर ने नियमित इलाज भी रोगियों को प्रदान करना जारी रखा। औसतन 250 रोगी वक्ष रोग विभाग में उपचार के लिए आ रहे हैं और 150 फोन कॉल टेलीमेडिसिन के माध्यम से प्राप्त हो रही हैं। एम्स में चिकित्सकों ने मार्च से मई के मध्य 809 बड़े ऑपरेशन किए और 1370 छोटे ऑपरेशन किए गए। इसमें कैंसर, ऑर्थो, ईएनटी, गायनी, न्यूरोसर्जरी जैसे बड़े ऑपरेशन भी शामिल थे। एम्स ने ओपीडी बंद करने के बाद भी सामान्य रोगियों को कभी भी वापस नहीं लौटाया। अभी भी इमरजेंसी में चार चिकित्सकों और एक नर्सिंग स्टॉफ की ड्यूटी सामान्य रोगियों को देखने के लिए तैनात किए गए हैं जिससे रोगियों को उपचार के बाद ही वापस भेजा जा सके।
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