
राजनीत में तेजी से बढ़ाते कदम और समाज सेवा का दंभ …..प्याऊ तो खोल दिया …..भीषण गर्मी में राहगीरों को शीतल पेयजल की आदर्श व्यवस्था अघोर गुरु पीठ बनोरा आश्रम के द्वारा संचालित ….जिसकी शहर में हो रही सराहना ….तो वहीं दूसरी ओर कह रहे ये कैसी राजनीत कैसी समाज सेवा
रायगढ़ ।
समाज व राष्ट्र की सेवा के लिए परम पूज्य श्री अघोरेश्वर महाप्रभु आश्रम के दिशा निर्देश पर प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी शीतल पेय जल की शहर के विभिन्न स्थानों में व्यवस्था की गई है। ग्रीष्म काल के दौरान भीषण गर्मी में औघड़ संत शिरोमणि पूज्य बाबा श्री प्रियदर्शी राम जी के मार्गदर्शन में अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा द्वारा मानव सेवा कल्याण हेतु अवधूत कृपा शुद्ध शीतल पेय जल प्याऊ की व्यवस्था की जाती रही है। इस वर्ष भी शहर के विभिन्न स्थानों पर शीतल पेयजल की समुचित व्यवस्था की गई है जिसका आश्रम से जुड़े धर्मबंधुओं द्वारा बखूबी संचालित की जा रही है।
प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी भीषण गर्मी को देखते हुए पूज्य बाबा जी के मार्गदर्शन व कृपा से अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा से जुड़े धर्मबंधुओं द्वारा शहर के चार स्थानों शीतल पेयजल राहगीरों को पिलाया जा रहा है।
यहां पर साफ सफाई से लेकर सम्मान जनक तरीके से राहगीरों को गुड़ खिलाकर गर्मी के दौरान राहत देने का पुण्य काम किया जा रहा है। साफ सुथरा शुद्ध ठंडा ठंडा पानी गुड के साथ साफ सुथरे कांच के गिलास रखकर तेज धूप और गर्मी के दौरान पानी पिलाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर शहर के एक युवा जो इन दिनों तेजी से राजनीत में पांव पसारते हुए रायगढ़ से भाजपा की ओर से टिकट के भी प्रबल दावेदारों की श्रेणी में प्रजेंट कर रहे हैं। उनके द्वारा शहर के कई स्थानों पर पूरे तामझाम के साथ प्याऊ की शुरुवात की गई इतना ही नहीं पोस्टर में बकायदा अपना फोटो भी लगवा कर बैनर लगवाया गया। लेकिन घड़ा रखकर मग और गिलास रखकर छोड़ दिया गया है। कुछ घड़े में पानी है लेकिन न तो पिलाने वाला है और न ही कोई देख रेख करने वाला, समाज सेवा के नाम पर प्याऊ खोल कर छोड़ दिया गया जिसकी लोगों में इसे लेकर चर्चाओं का भी बाजार गर्म भी है।
कुछ लोग तो यह भी कह रहे की यदि समाज सेवा करना ही था तो आश्रम के माध्यम से जिनके द्वारा संचालित किया जा रहा है उसी में यदि और सहयोग कर और अच्छी व्यवस्था कराया जाता तो राहगीरों को भी बेहतर सेवा मिलता और और इससे पुण्य के भी भागी बनते लेकिन जिस तरह से प्याऊ खोल कर छोड़ दिया गया है जिसकी न तो कोई देख रेख है और न ही कोई समुचित व्यवस्था । इसे न तो स्वच्छ समाज सेवा की संज्ञा दी जा सकती है और न ही सेवा भावना बस इसे दी जा सकती है तो वह है राजनीत की उपमा।