
एसईसीएल विस्थापितों ने विस्थापन लाभ में वृद्धि के लिए लगाई गुहार …..बरौद के ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी…..एसईसीएल के धीमे प्रबंधन पर उठाए सवाल
रायगढ़।
रायगढ़ जिले के वनांचल क्षेत्र में स्थित ग्राम बरौद के 331 परिवारों, जिनमें से 202 अनुसूचित जनजाति, 13 अनुसूचित जाति, 87 अन्य पिछड़ा वर्ग और 37 अन्य परिवार शामिल हैं, को साउथ ईस्ट कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) द्वारा कोयला धारक क्षेत्र के अधिग्रहण के तहत विस्थापित किया जाना है। कोल इंडिया लिमिटेड की पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति 2012 के तहत, जिन परिवारों ने पुनर्बसाहट स्थल के अलावा कहीं और बसने का विकल्प चुना है, उन्हें केवल 3 लाख रुपये की एकमुश्त राशि का प्रावधान किया गया है, जिससे ग्रामीण असंतुष्ट हैं।

ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें एसईसीएल की कोरबा जिले की गेवरा, दीपका, और कुसमुंडा परियोजनाओं के तर्ज़ पर प्रति वयस्क पात्र परिवार को 10 लाख रुपये और अतिरिक्त 5 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दी जाए। वर्तमान में, एसईसीएल ने केवल 3 लाख रुपये के प्रावधान को बनाए रखा है, जो ग्रामीणों के अनुसार अन्यायपूर्ण और नीति विरोधी है। ग्रामीणों ने एसईसीएल के प्रबंधन पर धीमी कार्यशैली और सोए हुए प्रबंधन का आरोप लगाते हुए, मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
विस्थापित परिवारों ने कोल इंडिया लिमिटेड की 2012 की पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति में संशोधन की मांग की है, ताकि उन्हें उचित विस्थापन लाभ मिल सके। इस मुद्दे पर ग्रामीणों ने एसईसीएल के अधिकारियों के साथ कई बार समझौता वार्ता की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। ग्रामीणों ने इस संबंध में राज्य और केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रियों से भी संपर्क किया है और उन्हें विश्वास है कि उनकी मांगों पर उचित कार्यवाही होगी।
हाल ही में, ग्रामीणों ने रायगढ़ के सांसद राधेश्याम राठिया से मुलाकात की, जिन्होंने इस मुद्दे को केंद्रीय कोयला मंत्री के समक्ष उठाने और समाधान के लिए उच्च स्तरीय अधिकारियों से चर्चा करने का आश्वासन दिया है।




