वीडियो बड़ी खबर::मनेंद्रगढ़ सामूहिक विवाह घोटाला: जांच में सही निकली कमरो की शिकायत शिकायत, फिर भी दोषी डीपीओ पर कार्रवाई नहीं!
अनूप बड़ेरिया
मनेन्द्रगढ़, 7 अप्रैल 2026 — मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में लगभग 21 लाख रुपये की खरीद और खर्च में भारी अनियमितता का मामला अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। जांच में शिकायत सही पाए जाने के बावजूद अब तक किसी ठोस कार्रवाई का अभाव सवाल खड़े कर रहा है।

भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो द्वारा उठाए गए इस मामले की जांच कलेक्टर कार्यालय (महिला एवं बाल विकास शाखा), जिला एमसीबी द्वारा गठित समिति ने की। समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान नियमों की अनदेखी कर सामग्री खरीदी गई और राशि खर्च की गई, जिससे योजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि उस समय पदस्थ जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी शुभम बंसल के खिलाफ शिकायत पूरी तरह सही पाई गई। रिपोर्ट शासन को भेजे जाने के बावजूद, वर्तमान में वे प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी के रूप में सूरजपुर में पदस्थ हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यवाही पर संदेह गहराता जा रहा है।
पूर्व विधायक का हमला—“कार्रवाई क्यों नहीं?”
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी शिकायत के बाद जांच में सच्चाई सामने आ चुकी है और कलेक्टर द्वारा महीनों पहले शासन को कार्रवाई के लिए पत्र भी भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने अपने मनेंद्रगढ़ दौरे के दौरान कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन स्थिति इसके उलट है। संबंधित अधिकारी को हटाने के बजाय उन्हें मंत्री के ही गृह जिले सूरजपुर में पदस्थ कर दिया गया है।
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मंत्री के आश्वासन पर सवाल
कमरो ने सवाल उठाया कि क्या मंत्री के बयान केवल औपचारिकता भर रह गए हैं? जिन अधिकारियों पर गंभीर वित्तीय अनियमितता के आरोप सिद्ध हो रहे हैं, उन्हें संरक्षण देना क्या उचित है?
अब भी कार्रवाई का इंतजार
उन्होंने बताया कि एमसीबी कलेक्टर द्वारा जांच प्रतिवेदन संचालनालय और सचिवालय, महिला एवं बाल विकास विभाग, नवा रायपुर को भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोषियों पर कार्रवाई कब होगी और शासन इस मामले में कब निर्णय लेगा?
कुल मिलाकर, जांच में घोटाले की पुष्टि होने के बाद भी कार्रवाई का न होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।




