
सांस्कृतिक परंपरा, साड़ी और एके-47 आईपीएस अंकिता शर्मा का मामला…नियमों की सख्ती और नारी शक्ति के बीच संतुलन …शक्ति का सर्वोत्तम रूप वही जहां परंपरा और कर्तव्य दोनों का सम्मान हो
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में दशहरा पर्व के अवसर पर पुलिस विभाग का शस्त्र पूजन इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। जिले की तेज-तर्रार एसपी अंकिता शर्मा द्वारा पारंपरिक परिधान (साड़ी) पहनकर शस्त्र पूजन करना और एके-47 से हर्ष फायरिंग करना दो अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखा जा रहा है। एक ओर इसे भारतीय संस्कृति, महिला सशक्तीकरण और शक्ति स्वरूपा देवी की आराधना के रूप में सराहा जा रहा है, तो दूसरी ओर पुलिस मैनुअल और प्रतिबंधित हथियार के इस्तेमाल को लेकर इसे तकनीकी नियमों के उल्लंघन से जोड़कर देखा जा रहा है, जिस पर आईजी ने स्पष्टीकरण भी मांगा है। यह मामला अब केवल अनुशासन का नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक परंपराओं और विभागीय प्रोटोकॉल के बीच एक बारीक रेखा का सवाल बन गया है।
दशहरा शक्ति, साहस और धर्म की विजय का पर्व है। इस दिन पुलिस विभाग में शस्त्र पूजन की ऐतिहासिक परंपरा रही है, जो मां काली की आराधना और समाज की सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति में किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या पूजा-पाठ के दौरान पारंपरिक परिधान पहनना स्वाभाविक है। एक भारतीय नारी साड़ी में न केवल शालीन, बल्कि शक्ति और देवी स्वरूप प्रतीत होती है। आईपीएस अंकिता शर्मा का साड़ी पहनकर पूजा करना इसी सांस्कृतिक आचरण का हिस्सा था। पूजा उपरांत हर्ष फायरिंग की परंपरा है इस दौरान उत्साह में एके 47 चलाने का मामला विवाद की वजह बन गया इसे ही विवाद की वजह बनी कुछ इसे उनके आत्मविश्वास और युवा बेटियों के लिए एक प्रेरणा के रूप में देख रहे है कि महिलाएं अपनी परंपराओं को सहेजते हुए देश की सुरक्षा जैसी बड़ी जिम्मेदारी भी बखूबी निभा सकती हैं।
नियमों का पेच और विवाद की वजह –
विवाद का मुख्य कारण पारंपरिक परिधान नहीं, बल्कि एके-47 जैसे प्रतिबंधित (प्रोहिबिटेड) हथियार से हर्ष फायरिंग करना रहा है। सेना के पूर्व अधिकारी और पुलिस महकमे के कुछ जानकारों ने इसे सुरक्षा मानकों और पुलिस मैनुअल के खिलाफ माना है। वर्दीधारी बलों में हथियारों के संचालन के सख्त नियम होते हैं, खासकर वरिष्ठ अधिकारियों के लिए, क्योंकि उनका आचरण कनिष्ठ कर्मचारियों के लिए नजीर बनता है। इसी तकनीकी चूक को आधार बनाते हुए आईजी अजय यादव ने एसपी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है, जिसकी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय भेजी जाएगी।
परंपरा और प्रोटोकॉल के बीच का सच
अगर पुलिस विभाग के पिछले हर्ष फायरिंग और शस्त्र पूजन के आयोजनों पर गौर करें, तो अक्सर अधिकारी पूजा-पाठ के कारण सामान्य या पारंपरिक कपड़ों में ही नजर आते रहे हैं। ड्रेस कोड का कोई बहुत सख्त पालन इस अवसर पर अमूमन नहीं देखा गया है। ऐसे में एक महिला अधिकारी के साड़ी पहनने को ही बड़ा मुद्दा या ‘गुनाह’ बना देना एकपक्षीय प्रतीत होता है। एके-47 का चयन संभवतः उत्सुकता या एक नए हथियार के प्रतीकात्मक इस्तेमाल का हिस्सा हो सकता है, इसके पीछे कोई जानबूझकर नियम तोड़ने की मंशा एक कर्तव्यनिष्ठ और तेजतर्रार ऑफिसर द्वारा नहीं रही होगी।
यह पूरी घटना नियमों की कठोरता और सांस्कृतिक मान्यताओं के बीच एक नारी शक्ति के सामंजस्य को बैठाने की जरूरत को दर्शाती है। बेशक पुलिस विभाग में हथियारों के संचालन के नियम सख्त और अनिवार्य हैं लेकिन किसी त्योहार के अनुष्ठान में साड़ी पहनने जैसी स्वाभाविक पारंपरिक पसंद को अनुशासनहीनता का मुख्य बिंदु बना देना मुनासिब नहीं है। अंकिता शर्मा जैसी मेहनती, संघर्षशील और तेज-तर्रार महिला अधिकारी का इस तरह के विवाद में घिरना दुर्भाग्यपूर्ण है। आवश्यक है कि इस मामले को एक तकनीकी चूक के रूप में देखा जाए, न कि किसी अधिकारी की कार्यक्षमता या महिला होने पर सवाल उठाने के मौके के रूप में। शक्ति का सर्वोत्तम रूप वही है, जहां परंपरा और कर्तव्य दोनों का सम्मान हो।
शमशाद अहमद




