
गांजा तस्करी मामले में न्यायालय का बड़ा फैसला दो अभियुक्तों को 10-10 साल का सश्रम कारावास …. 24 किलो गांजे के साथ पकड़े गए थे आरोपी……. रायगढ़ विशेष न्यायालय ने सुनाया दंड…एक एक लाख के ….
रायगढ़। विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट प्रियंका अग्रवाल की अदालत ने मादक पदार्थ गांजा की तस्करी के एक गंभीर मामले में अपना फैसला सुनाते हुए दो अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने अभियुक्त सियाराम यादव और सोनभद्र राजवाड़े को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और 1-1 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
मामले की संक्षिप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना 15 जनवरी 2024 की है। थाना डोंग़रीपाली के सहायक उपनिरीक्षक को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक सफेद रंग की मारुति डिजायर कार क्रमांक CG10 AM-9326 में अवैध मादक पदार्थ ले जाया जा रहा है। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर कार को रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद कार सवारों ने पुलिस वाहन को टक्कर मारकर भागने की कोशिश की। अंततः जंगल के पास पुलिस ने कार को पकड़ा, जिसमें से 24 पैकेटों में कुल 24 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया।
अभियोजन पक्ष की ओर से सिद्धेश पटनायक और तन्मय बनर्जी अपर लोक अभियोजक ने तर्क प्रस्तुत किए। न्यायालय ने पाया कि अभियुक्तों के कब्जे से बरामद गांजा ‘वाणिज्यिक अर्थात व्यापार की श्रेणी में आता है। साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर, न्यायालय ने एन.डी.पी.एस. एक्ट की धारा 20(b)(ii)(C) के तहत दोनों को दोषी पाया।
न्यायालय ने दोनों आरोपियों सियाराम यादव और सोनभद्र राजवाड़े को 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास के साथ अर्थदंड के रूप में 1-1 लाख रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया गया जिसमे यह भी कहा गया है कि जुर्माना न भरने पर 6 माह का अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी।

तस्करी में प्रयुक्त मारुति डिजायर कार को राजसात करने का आदेश दिया गया है। न्यायालय में आदेश में कहा कि अभियुक्तों सियाराम यादव और सोनभद्र राजवाड़े द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को उनकी कुल सजा में शामिल किया जाएगा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अभियुक्तों का यह कृत्य समाज के विरुद्ध एक गंभीर अपराध है, जिसके कारण उन्हें न्यूनतम निर्धारित सजा से कम दंड देने का कोई विकल्प मौजूद नहीं था।




