
विश्व आदिवासी दिवस पर पनिका समाज ने बुलंद की अपनी आवाज, सर्व आदिवासी समाज के साथ निकाली भव्य रैली
जिला अध्यक्ष राजाराम जांता बोले—1971 से पूर्व पनिका समाज के आदिवासी स्वरूप को इतिहास में समझना और समाज के बीच मजबूती से रखना जरूरी
लाल दास महंत कल्ला की रिपोर्ट
कोरिया/बैकुंठपुर। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर भारतीय पनिका समाज, जिला कोरिया ने सर्व आदिवासी एवं मूलनिवासी समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर अपनी सहभागिता दर्ज कराई। 9 अगस्त 2026, रविवार को बैकुंठपुर में आयोजित रैली एवं आमसभा में पनिका समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में शामिल होकर सामाजिक एकता, संस्कृति एवं ऐतिहासिक पहचान के संरक्षण का संदेश दिया।
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर प्रेमाबाग से मानस भवन तक भव्य रैली निकाली गई। रैली में सर्व आदिवासी समाज के साथ भारतीय पनिका समाज के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं समाज के लोग उत्साहपूर्वक शामिल हुए। रैली के दौरान सामाजिक एकता और अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।
रैली के पश्चात मानस भवन में आमसभा आयोजित की गई। सभा में आदिवासी समाज के अधिकारों, सामाजिक एकता, संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण तथा ऐतिहासिक पहचान से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

राजाराम जांता ने मंच से रखा पनिका समाज का ऐतिहासिक संदर्भ
आमसभा को संबोधित करते हुए भारतीय पनिका समाज, जिला कोरिया के जिला अध्यक्ष राजाराम जांता ने पनिका समाज के ऐतिहासिक एवं सामाजिक संदर्भ को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि वर्ष 1971 से पूर्व पनिका जाति भी आदिवासी समुदाय का हिस्सा थी। ऐसे में पनिका समाज के इतिहास और आदिवासी पहचान से जुड़े विषयों को समाज के बीच मजबूती से रखने तथा नई पीढ़ी को अपने इतिहास से अवगत कराने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि समाज को अपने इतिहास, संस्कृति, परंपराओं और अधिकारों के प्रति जागरूक रहना होगा। सामाजिक एकता को मजबूत किए बिना किसी भी समाज के अधिकारों और पहचान की प्रभावी आवाज बुलंद नहीं की जा सकती।
जिला अध्यक्ष राजाराम जांता ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकारों, सम्मान, संस्कृति और पहचान के संरक्षण का संकल्प लेने का दिन है। उन्होंने समाज के लोगों से अपनी सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक संदर्भों को समझने तथा सामाजिक एकता के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के माध्यम से सामाजिक एकता, आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण तथा ऐतिहासिक अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।





