
बड़ी खबर::बैकुंठपुर में रेलवे टिकट दलाली का बड़ा खुलासा: 60 आरक्षित टिकटों का अवैध कारोबार, ₹3.68 लाख के टिकट बरामद..आरोपी कर्मी सहित 2 गिरफ्तार
अनूप बड़ेरिया
बैकुंठपुर। रेलवे सुरक्षा बल की जांच में बैकुंठपुर सीटी पीआरएस काउंटर से तत्काल एवं सामान्य आरक्षित टिकटों की अवैध खरीद-बिक्री के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। मामले में पीआरएस से जुड़े संविदा कर्मचारी अविनाश कुमार और उत्तर प्रदेश निवासी संजय कुमार विश्वकर्मा को गिरफ्तार किया गया है। दोनों के कब्जे और मोबाइल से 60 नग रेलवे आरक्षित टिकटों के स्क्रीनशॉट, जिनकी कुल कीमत 3,68,351 रुपये बताई गई है, बरामद किए गए हैं।
मामले की शुरुआत 1 अगस्त 2026 को हुई, जब बैकुंठपुर सीटी पीआरएस काउंटर से खाली टिकट पर हाथ से पीएनआर नंबर एवं अन्य जानकारी लिखकर जारी किया गया टिकट इलाहाबाद जंक्शन पर जांच के दौरान पकड़ा गया। सिस्टम में जांच करने पर संबंधित पीएनआर नंबर गलत पाया गया। इस मामले में जीआरपी जौनपुर ने अपराध क्रमांक 22/26, दिनांक 05 अगस्त 2026 को बीएनएस की धारा 318(4), 319(2) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच आगे बढ़ने पर सामने आया कि बैकुंठपुर पीआरएस में कार्यरत नगर पालिका के संविदा कर्मचारी अविनाश कुमार पिता शंभू सिंह, उम्र 35 वर्ष, निवासी नवापारा सरडी, थाना चरचा, जिला कोरिया द्वारा खाली टिकटों पर हाथ से जानकारी भरकर टिकट तैयार किए जाते थे। इसके बाद इन्हें संजय कुमार विश्वकर्मा पिता अमरनाथ विश्वकर्मा, उम्र 48 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक 21, पिरखापुर, थाना एवं जिला भदोही, उत्तर प्रदेश तक भेजा जाता था।
जांच में दोनों आरोपियों ने कथित रूप से स्वीकार किया कि अविनाश कुमार टिकट तैयार कर बस के माध्यम से संजय कुमार को बनारस भेजता था और इसके बदले उसे प्रति व्यक्ति 400 रुपये कमीशन मिलता था। वहीं संजय कुमार टिकट प्राप्त कर अलग-अलग ग्राहकों को बेचता था तथा प्रत्येक व्यक्ति पर 600 से 800 रुपये तक अतिरिक्त लाभ कमाता था।
मोबाइल की जांच के दौरान व्हाट्सऐप चैट में 60 नग तत्काल एवं सामान्य रेलवे आरक्षित टिकटों की जानकारी मिली। इनमें 14 नग खाली टिकटों पर हाथ से लिखे गए पीएनआर नंबर एवं अन्य विवरण भी शामिल थे, जिन्हें अविनाश कुमार के मोबाइल से भेजा गया था। पूछताछ में अविनाश ने काउंटर से तत्काल टिकट बनाने और 14 टिकट हाथ से लिखकर संजय कुमार को देने की बात स्वीकार की।
जांच के दौरान जब दोनों से रेलवे आरक्षित टिकटों की खरीद-बिक्री के लिए वैध अधिकार-पत्र एवं संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया, तो वे कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद मोबाइल से मिले 60 नग तत्काल रेलवे आरक्षित टिकटों के स्क्रीनशॉट निकालकर जब्त किए गए, जिनकी कुल कीमत 3,68,351 रुपये आंकी गई है।
रेलवे सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने दोनों के खिलाफ रेल अधिनियम की धारा 143 के तहत कार्रवाई करते हुए अपराध क्रमांक 727/26, दिनांक 16 अगस्त 2026 दर्ज किया। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आवश्यक कार्रवाई की गई। संपूर्ण कार्रवाई के बाद माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार आरोपियों को जमानत का लाभ दिया गया है।
मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी अभी बाकी बताई गई है। जांच एजेंसियां अब टिकटों की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़े पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।




