बैकुंठपुर के वार्ड-12 की वोटर लिस्ट में ‘वोट शिफ्टिंग’ का खेल? दूसरे वार्डों के मतदाताओं के नाम जोड़ने की शिकायत से मचा हड़कंप!
कलेक्टर के दरबार में पहुंचा मतदाता सूची का मामला, वार्ड की सीमा से बाहर रहने वालों के नाम जोड़ने के प्रयास का आरोप; भौतिक सत्यापन के बिना नामांतरण पर रोक और निष्पक्ष जांच की मांग
अनूप बड़ेरिया
बैकुंठपुर (Page11News)। नगर पालिका बैकुंठपुर के वार्ड क्रमांक 12 की मतदाता सूची को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दूसरे वार्डों के मतदाताओं के नाम वार्ड-12 में जोड़ने के लिए आवेदन किए जाने के आरोप ने निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले को लेकर कलेक्टर कोरिया के समक्ष लिखित शिकायत वार्ड क्रमांक 12 से पार्षद हेतु भाजपा के संभावित व प्रबल दावेदार अनुराग दुबे ने प्रस्तुत कर तत्काल जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है। अब सवाल यह है कि क्या मतदाता सूची में नामों का स्थानांतरण वास्तविक निवास के आधार पर हो रहा है या इसके पीछे कोई चुनावी समीकरण साधने की कोशिश है?
चार महीने में बदला निवास या बदलने लगी चुनावी गणित?
शिकायत में अनुराग दुबे ने दावा किया गया है कि हाल ही में संपन्न विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाताओं ने अपने वास्तविक निवास के आधार पर मतदाता सूची में नाम दर्ज कराया था। जनगणना के प्रथम चरण में भी मकान और निवास संबंधी जानकारियां दर्ज की गई हैं। इसके बावजूद महज चार माह के भीतर बड़ी संख्या में मतदाताओं द्वारा वार्ड परिवर्तन के आवेदन प्रस्तुत किए जाने को शिकायतकर्ता ने संदेहास्पद बताया है।
आवेदन में अनुराग दुबे ने आरोप लगाया गया है कि ऐसे मतदाताओं के नाम भी वार्ड क्रमांक 12 में जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिनका वास्तविक निवास वार्ड की निर्धारित परिसीमा के भीतर नहीं है। यदि यह आरोप जांच में सही पाया जाता है, तो मतदाता सूची की शुद्धता और निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
कलेक्टर से पांच बिंदुओं पर सख्त कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता श्री दुबे ने कलेक्टर से मांग की है कि वार्ड-12 में अन्य वार्डों से नाम स्थानांतरित कराने के लिए प्रस्तुत सभी आवेदनों की गंभीरता से जांच कराई जाए। पूरी प्रक्रिया उच्च अधिकारियों की निगरानी में संपन्न हो तथा निष्पक्ष और सक्षम अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी जाए।
इसके अलावा किसी भी मतदाता का नाम जोड़ने अथवा एक वार्ड से दूसरे वार्ड में स्थानांतरित करने से पहले उसके वास्तविक निवास का भौतिक सत्यापन अनिवार्य करने की मांग की गई है। सत्यापन के दौरान संबंधित मतदाता के हालिया SIR रिकॉर्ड, जनगणना में दर्ज मकान संख्या, उपलब्ध पट्टे के दस्तावेजों तथा अन्य अभिलेखों की जांच करने पर जोर दिया गया है।
शिकायत में यह भी मांग की गई है कि आधार कार्ड में दर्ज पते को अन्य दस्तावेजों के साथ सहायक प्रमाण के रूप में देखा जाए और मतदाता का नाम उसी वार्ड की सूची में दर्ज हो, जिसकी निर्धारित सीमा के भीतर उसका वास्तविक निवास स्थित है।
मतदाता सूची या चुनावी समीकरण? प्रशासन की भूमिका पर निगाहें
शिकायतकर्ता अनुराग दुबे का कहना है कि मतदाता सूची किसी भी लोकतांत्रिक चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है। यदि वास्तविक निवास का सत्यापन किए बिना अन्य वार्डों के मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं, तो इससे वार्ड के वास्तविक मतदाताओं के प्रतिनिधित्व और आगामी निर्वाचन की निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका है।
कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में तत्काल संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का आग्रह किया गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वार्ड-12 की मतदाता सूची में नामों के इस कथित फेरबदल के पीछे वास्तविक कारण क्या है? क्या प्रशासन शिकायत पर जांच कर स्थिति स्पष्ट करेगा, या मतदाता सूची को लेकर उठे सवाल चुनावी माहौल में और गहराएंगे?




