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सम्यग दर्शन धर्मरूपी महल की नींव……साध्वी रत्नज्योति

दक्षिणपथ, दुर्ग। आनदं मधुकर रतन भवन दुर्ग में नवकार महामंत्र की वंदना के साथ धर्म सभा प्रारंभ हुई आज धर्म सभा को साधवी डॉ. विच्क्षण श्री जी एवं साध्वी रत्न ज्योति जी ने संबोधित किया आज धर्म सभा सम्यग दर्शन के विषय पर केन्द्रीय रही अनेक रोचक धार्मिक कहानियों एवं प्रमुख प्रसंगो के साथ धर्मसभा चली।
श्रमण संघ दुर्ग द्वारा महासती प्रियदर्शना जीके सानिध्व एवं प्रेरणा से आनंद पुष्कर दरबार में प्रात- 6 बजे से दोपहर 3 बजे तक नवकार महामंत्र का नियमित जाप अनुष्ठान चल रहा हैं साथ ही बेले एवं तेले तप की तपस्या प्रारंभ है साथ ही त़णघ्र तप की तैयारी चल रही है।
आज धर्म सभा को संबोधित करते हुए साध्वी रत्नज्योति ने कहा-म्थ्यिादर्शन का फल संसार है, सम्यगदर्शन का फल मोक्ष है। सम्यगदर्शन नहीं उसके लिए मोक्ष दुलर्भ है मोक्ष का अधिकारी कौन प्रभु महावीर ने कहा जिसमें गुण है वही मोक्ष का अधिकारी है गुण कौन सा सम्यगदर्शन क्या है सम्यक सत्य तरीके से जानना देखना मानना ही सम्यग दर्शन है। जो आत्मा के अनंतगुणो को विकसित करने में सहायक हैं वह सम्यक्त्व है सम्यगदर्शन साधना का सौदर्य है जिस व्यक्ति के हाथ में गरूड् रेखा है उसे सांप से डर नही लगता उसी प्रकार जिस साधक के पास सम्यगदर्शन रूपी गरूड् रेखा है उसे पाप रूपी सांप काट नही सकता। सम्यगदर्शन पारसमणि के समान है प्रत्येक साधना सोन बन जाती है सम्यगदर्शन जाग़त होते ही कर्म की जडे हिलने लगती है। कर्मरूपी रोग मिट जाते है।

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