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भैयालाल राजवाड़े की जीत के असली सूत्रधार शैलेष शिवहरे…अंबिका सिंहदेव के खिलाफ खुल कर खोला था मोर्चा..टिकट के भी रहे प्रबल दावेदार…

अनूप बड़ेरिया

शैलू तेरी कुर्बानी रंग लाई..बैकुंठपुर ने होली दिवाली संग मनाई…” इस तरह के स्लोगनों से सोशल मीडिया अटा पड़ा है। यह स्लोगन शैलेष शिवहरे के त्याग, समर्पण और सेवा भावना के लिए उनके समर्थकों ने लिखा है। गद्दारी जिसके खून में नहीं और स्वाभिमान से समझौता नहीं करने वाले शैलेश शिवहरे ने इस बार जी जान से काम कर जिस तरह भाजपा को जिताने में अपनी अहम भूमिका निभाई है, वह काबिले तारीफ है।
 दरअसल बैकुंठपुर नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष व भाजपा जिला उपाध्यक्ष शैलेष शिवहरे पिछली बार की तरह इस पंचवर्षीय भी भाजपा से टिकट के प्रबल दावेदार रहें हैं। इसके लिए वह पिछले कई सालों से जनता के बीच जा कर अपनी टीम के साथ जबरजस्त मेहनत भी कर रहें थे। लेकिन जातीय समीकरण की वजह से भाजपा ने लगातार 5 वीं बार भी टिकट भैयालाल राजवाड़े को दिया। जिसके बाद मीडिया में यह चलने लगा की शैलेष शिवहरे निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं। उनके समर्थकों ने उन पर निर्दलीय चुनाव लड़ने का भी दबाव बनाया। उधर यह भी चर्चा उड़ गई कि  भैयालाल राजवाड़े को टिकट मिलने बावजूद इसके वह शैलेश शिवहरे से श्री राजवाड़े न मिलने आए और ना ही चुनाव में साथ देने की बात कही है। जिससे शैलेश शिवहरे और उनके समर्थक नाराज हैं। लेकिन जैसा कि सभी जानते हैं स्वाभिमान से समझौता नहीं करने वाले शैलेश शिवहरे को जैसे ही पार्टी और भाजपा प्रत्याशी भैया लाल राजवाड़े से अपनत्व  मिला उन्होंने फौरन ही अपनी टीम को भैयालाल राजवाड़े के पक्ष में तन, मन, धन से काम करने के लिए कमरकस तैयार रहने को कह दिया। इसके बाद उनकी टीम पूरी जी जान के साथ बूथ स्तर पर भाजपा के प्रचार और मोदी गारंटी की योजनाओं को जान जनता पहुंचने के काम में लग गई। उल्लेखनीय है कि भाजपा के जिला उपाध्यक्ष शैलेश शिवहरे एक बड़े जनाधार वाले नेता हैं, इनके पास कार्यकर्ता और समर्थकों की एक लंबी फौज है। धार्मिक एवं सांस्कृतिक व खेलकूद आयोजन कराने की वजह से शहरी क्षेत्र के अलावा आसपास के ग्रामीण इलाकों में इनकी अच्छी पकड़ व पहचान के साथ व्यापक जन आधार भी है। छोटो को स्नेह व अपने से बड़ों को सम्मान देने वाले शैलेश शिवहरे की टीम ने भैयालाल राजवाड़े के पक्ष में जमकर प्रचार किया। यही वजह है कि बैकुंठपुर शहर के साथ पुराने नगर पालिका को मिलाकर लगभग 5000 से अधिक मतों से भाजपा ने बड़ी बढ़त हासिल की और इस गड्ढे को कांग्रेस पाट नहीं पाई। नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस इस सीट को गंवा बैठी। सबसे दीगर बात तो यह है कि चुनाव के समय हर आम सभा चुनाव में शैलेश शिवहरे ने पार्टी की ओर से मोर्चा संभालते हुए कांग्रेस प्रत्याशी अंबिका सिंहदेव के ऊपर जमकर हमला बोला चाहे वह भ्रष्टाचार की बात हो या जिला विभाजन की हर मुद्दे पर उन्होंने कांग्रेस व उसके प्रत्याशी को जमकर खरी-कोटी सुनाई। जिसकी वजह से भी मतदाता शैलेश शिवहरे के भाषण के बाद भाजपा के पक्ष में प्रभावित नजर आए। उल्लेखनीय है कि इसके पहले भी भैयालाल राजवाड़े 2008 और 2013 के चुनाव में जीते रहे तब भी शैलेश शिवहरे की अहम भूमिका किसी से छुपी नहीं है। शैलेश शिवहरे के हर आयोजन व कार्यक्रम में भाजपा नेताओं में पूर्व कैबिनेट मंत्री भैयालाल राजवाड़े की तस्वीर बड़ी सी अलग ही देखी जा सकती थी। जब वह पद में रहे तब भी और जब वह पद में नहीं रहे तब भी। यह शैलेश शिवहरे का भैयालाल राजवाड़े के प्रति लगाव या सम्मान ही कहा जा सकता है। अब देखना यह है कि भैयालाल के प्रति समर्पित भाजपा के इस कद्दावर नेता को पार्टी उनकी इस ईमानदारी पूर्ण किए गए चुनावी कार्य का क्या परितोषक देता है।

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