
जिल्दा सहकारी समिति में 68 लाख के खाद घोटाले का खुलासा..246.75 मीट्रिक टन उर्वरक गायब, प्रबंधक पर एफआईआर दर्ज; कलेक्टर बोले—दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
लाल दास महंत कल्ला की रिपोर्ट
कोरिया/बैकुण्ठपुर। कोरिया जिले की आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्या. जिल्दा में करोड़ों की उर्वरक अनियमितता का बड़ा मामला सामने आया है। समिति में 246.75 मीट्रिक टन खाद कम पाए जाने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए समिति प्रबंधक अखिलचन्द के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत एफआईआर दर्ज कराई है।
जानकारी के अनुसार यह मामला जनसमस्या निवारण शिविर में प्राप्त शिकायत के बाद उजागर हुआ। ग्राम जिल्दा निवासी रामप्रताप साहू ने शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि किसानों के लिए आवंटित रासायनिक खाद को बिचौलियों को औने-पौने दामों में बेच दिया गया, जिसके कारण किसानों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही थी।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए 13 मई 2026 को कृषि विभाग की उर्वरक निरीक्षक पुष्पा ठाकुर, नायब तहसीलदार पोड़ी-बचरा तथा सहकारिता विभाग की संयुक्त टीम ने समिति के गोदाम का भौतिक सत्यापन किया। जांच के दौरान ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर पाया गया।
जांच में सामने आया कि ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार समिति में कुल 431.55 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध होना दर्ज था, जबकि गोदाम में मात्र 184.80 मीट्रिक टन खाद ही मिला। इस प्रकार कुल 246.75 मीट्रिक टन उर्वरक कम पाया गया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 68 लाख रुपये आंकी गई है।
जांच प्रतिवेदन में बताया गया कि समिति को जिला विपणन संघ से यूरिया, डीएपी, एमओपी, एनपीके एवं एसएसपी उर्वरक प्राप्त हुए थे। आरोप है कि किसानों में वितरण करने के बजाय खाद को अवैध रूप से बिचौलियों को बेच दिया गया।
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्या. अंबिकापुर के नोडल अधिकारी के.पी. मिश्रा द्वारा थाना बैकुण्ठपुर में आवेदन प्रस्तुत किए जाने के बाद कलेक्टर के निर्देश पर समिति प्रबंधक (निलंबित) अखिलचन्द के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
कलेक्टर ने स्पष्ट कहा है कि किसानों के हक पर डाका डालने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। वहीं थाना बैकुण्ठपुर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।




