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आंगनबाड़ी भर्ती में धांधली के आरोप से गरमाई सियासत, आवेदकों ने कलेक्टर से मांगी उच्चस्तरीय जांच..पूर्व विधायक गुलाब कमरो बोले— महिला एवं बाल विकास विभाग बन गया है भ्रष्टाचार का अड्डा, दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई…

अनूप बड़ेरिया

मनेंद्रगढ़/एमसीबी। जिले में हाल ही में संपन्न हुई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। भर्ती में कथित अनियमितताओं और पक्षपात के आरोपों ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कई आवेदकों ने कलेक्टर से शिकायत कर पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं में आरती (चैनपुर), कुसुम कली (सिरौली), मीना सिंह (बुंदेली), सुमित्रा (सिरौली), रामवती (परसगढ़ी) एवं संजुबाई (शंकरगढ़) सहित अन्य अभ्यर्थी शामिल हैं। उनका आरोप है कि अंतिम दावा-आपत्ति सूची जारी होने के बाद भी कई स्थानों पर अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को चयन से वंचित कर दिया गया, जबकि उनसे कम अंक पाने वाले उम्मीदवारों का चयन कर लिया गया।
आवेदकों ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में जाति प्रमाण पत्र एवं गरीबी रेखा सूची के आधार पर मिलने वाले निर्धारित अंक भी नहीं दिए गए, जिससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कर वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की है।
इस मुद्दे को लेकर आवेदकों ने पूर्व विधायक गुलाब कमरो से भी मुलाकात की। उन्होंने आवेदकों की शिकायतों को गंभीर बताते हुए जिला प्रशासन से तत्काल निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।


पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने महिला एवं बाल विकास विभाग पर निशाना साधते हुए कहा कि जिले में विभाग की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, संविदा भर्ती और अब आंगनबाड़ी भर्ती जैसे मामलों में पारदर्शिता को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।
कमरो ने कहा कि यदि जिला प्रशासन शीघ्र कार्रवाई नहीं करता है तो मामले को राज्य स्तर तक उठाया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उच्च स्तर पर शिकायत कर कठोर कार्रवाई की मांग की जाएगी।
गौरतलब है कि महिला एवं बाल विकास विभाग की भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें और जांच की मांग उठ चुकी है। ऐसे में आंगनबाड़ी भर्ती को लेकर सामने आए नए आरोपों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब प्रदेशभर की निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई और संभावित जांच पर टिकी हुई हैं।

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