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​सत्तारूढ़ दल होकर भी विपक्ष की तरह सड़कों पर उतरने की मजबूरी—क्या यह केंद्र और राज्य सरकार की पूर्ण विफलता की खुली स्वीकारोक्ति है..?

 

 

​सत्ताधारी दल की महिला शाखा द्वारा ‘विपक्ष’ बनने का ढोंग: महज 50 लोगों की भीड़ ने खोली भाजपा की पोल— अब देश संभालने में असमर्थ भाजपा ने राहुल गांधी जी के नेतृत्व को माना: तारेन्द्र डनसेना

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• ​महिला पहलवानों, हाथरस, अंकिता भंडारी और मणिपुर की बर्बरता पर चुप्पी साधने वाली भाजपा का ‘सिर्फ 50 लोगों’ वाला घेराव महज एक हास्यास्पद राजनीतिक नौटंकी।

​रायगढ़ । भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा, जिला रायगढ़ द्वारा आयोजित कागजी और फ्लाप ‘कांग्रेस भवन घेराव’ कार्यक्रम पर तीखा प्रहार करते हुए जिला कांग्रेस प्रवक्ता तारेन्द्र डनसेना ने इसे पूरी तरह से हास्यास्पद, मुद्दाविहीन और अपनी चौतरफा विफलताओं पर पर्दा डालने की नाकाम कोशिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि सत्ता में होने के बावजूद यदि भाजपा को महज 50 से 60 गिने-चुने लोगों के साथ प्रदर्शन करना पड़े, तो यह साफ दिखाता है कि जनता अब इनसे पूरी तरह किनारा कर चुकी है।

​राहुल गांधी जी के नेतृत्व का स्पष्ट स्वीकारोक्ति

​प्रेस विज्ञप्ति में विशेष जोर देते हुए जिला कांग्रेस प्रवक्ता तारेन्द्र डनसेना ने कहा कि भाजपा महिला मोर्चा के इस अजीबोगरीब और फ्लॉप विरोध प्रदर्शन से यह स्पष्ट संदेश मिल रहा है कि अब देश आदरणीय नरेंद्र मोदी जी से बिल्कुल नहीं संभल रहा है। सत्ता में एक लंबा अरसा गुजारने के बाद भी यदि सत्ताधारी दल की महिला इकाई को सड़कों पर उतरना पड़े, तो यह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि देश की जनता का अटूट विश्वास अब श्री राहुल गांधी जी के नेतृत्व पर है और जनता उन्हें देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखने का पूरा मन बना चुकी है।

​उन्होंने आगे कहा कि जब सत्ता पक्ष खुद महज 50 से, 60 लोगों को लेकर विपक्ष की तरह सड़क पर उतरे, तो यह साबित हो जाता है कि राहुल गांधी जी का राजनीतिक कद और जनसमर्थन कितना विराट हो चुका है। भाजपा अब खुद को देश की बेबस और लाचार पार्टी महसूस कर रही है।

​कांग्रेस प्रवक्ता के तीखे एवं सीधे सवाल

1. ​मुश्किल से 50 लोगों का यह प्रायोजित तमाशा क्यों? जिस पार्टी की केंद्र और राज्य दोनों जगह सरकार हो, वह यदि शक्ति प्रदर्शन के नाम पर सिर्फ 50 लोगों को जुटा पाए, तो यह साफ बताता है कि जनता और खुद महिला कार्यकर्ताओं में भी इस खोखले प्रदर्शन के प्रति कितना आक्रोश और उदासीनता है। यह सत्ता संरक्षित एक फ्लाप शो के सिवा कुछ नहीं है।
2. ​देश का नाम रोशन करने वाली महिला पहलवानों के शोषण पर चुप्पी क्यों? जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहराने वाली हमारी बेटियां दिल्ली की सड़कों पर न्याय के लिए रो रही थीं और भाजपा के ही बाहुबली नेता के खिलाफ महीनों आंदोलन करती रहीं, तब इस महिला मोर्चा का विवेक कहाँ सो रहा था?
3. ​हाथरस, अंकिता भंडारी कांड और मणिपुर हिंसा पर मौन क्यों? उत्तर प्रदेश के हाथरस में पीड़िता के शव को रात के अंधेरे में जलाने की घटना, उत्तराखंड का चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड, और मणिपुर में महिलाओं के साथ हुई अमानवीय बर्बरता—इन तमाम घटनाओं पर भाजपा के मुख्यमंत्रियों से सवाल पूछने या भाजपा कार्यालयों का घेराव करने की हिम्मत इस महिला मोर्चा ने कभी क्यों नहीं दिखाई?
4. ​बढ़ते अपराध और तानाशाही पर खामोशी क्यों? राजधानी दिल्ली से लेकर देश के अन्य हिस्सों में महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार और अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिसिया बर्बरता के वीडियो पूरे देश ने देखे हैं। क्या भाजपा महिला मोर्चा में इतनी नैतिक हिम्मत है कि वह गृहमंत्री अमित शाह जी के निवास या भाजपा के केंद्रीय कार्यालय का घेराव कर सके?

​जनता के असली सवालों से ध्यान भटकाने की साजिश

​तारेन्द्र डनसेना ने कहा कि देश और प्रदेश की जनता अब पूरी तरह जागरूक हो चुकी है। वोट चोरी, बेरोजगारी, आसमान छूती महंगाई और गिरती कानून-व्यवस्था पर जनता सीधे तौर पर मोदी सरकार से जवाब मांग रही है। जनता के इस बढ़ते जनाक्रोश से घबराकर ही भाजपा सत्ता में रहते हुए भी इस तरह के फर्जी, प्रायोजित और 50 से 60 लोगों के सिमटे हुए घेराव का नाटक कर रही है। जनता भली-भांति जानती है कि किस दल में महिलाओं का वास्तविक सम्मान है और कौन सी पार्टी केवल पाखंड रच रही है।

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