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हरेली के दिन हरे-भरे बरगद पर चली आरी! करोड़ों के पौधारोपण के दावों के बीच बैकुंठपुर में वर्षों पुराने बरगद की गुपचुप कटाई से उठे सवाल, किस विभाग की अनुमति से काटा जा रहा पेड़?

अनूप बड़ेरिया

कोरिया/बैकुंठपुर। एक ओर छत्तीसगढ़ में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर में वर्षों पुराने हरे-भरे बरगद के पेड़ की कथित रूप से गुपचुप तरीके से कटाई किए जाने का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि जिस दिन प्रदेश का प्रमुख पर्व हरेली मनाया जा रहा है, उसी दिन शहर के बीचों-बीच एक विशाल और वर्षों पुराने पेड़ पर आरी चलने की खबर ने पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों को चिंतित कर दिया है।

मामला बैकुंठपुर नगर के वार्ड क्रमांक 12 स्थित बाई सागर पारा चौपाटी के पीछे का बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां लंबे समय से खड़ा हरा-भरा बड़ा बरगद का पेड़ अब काटा जा रहा है। पेड़ की कटाई किस विभाग या संस्था के निर्देश पर की जा रही है, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ सकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने पुराने और विशाल पेड़ को काटने की अनुमति किसने दी और क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी है?

हरेली पर पेड़ कटने से उठे गंभीर सवाल

छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा में हरेली पर्व का विशेष महत्व है। यह पर्व प्रकृति, हरियाली और कृषि संस्कृति से जुड़ा हुआ है। ऐसे अवसर पर जहां लोग प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं, वहीं बैकुंठपुर में एक पुराने हरे-भरे बरगद के पेड़ की कटाई की सूचना सामने आने से सवाल उठना स्वाभाविक है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर में पहले से ही तेजी से बढ़ते निर्माण और विकास कार्यों के कारण हरियाली कम होती जा रही है। ऐसे में वर्षों पुराने पेड़ शहर की प्राकृतिक धरोहर की तरह हैं। यदि किसी अपरिहार्य कारण से ऐसे पेड़ को हटाना आवश्यक हो, तो पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और संबंधित विभागों की अनुमति तथा नियमों का पालन किया जाना चाहिए।

करोड़ों के पौधारोपण बनाम पुराने पेड़ों की कटाई

पर्यावरण संरक्षण के लिए हर वर्ष शासन-प्रशासन द्वारा पौधारोपण अभियान चलाए जाते हैं। लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर पौधे लगाए जाते हैं, उनकी सुरक्षा और संरक्षण के दावे किए जाते हैं। लेकिन दूसरी ओर यदि शहर में दशकों पुराने पेड़ों को बिना स्पष्ट जानकारी और अनुमति के काटे जाने की शिकायत सामने आती है, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

एक विशाल बरगद का पेड़ तैयार होने में वर्षों नहीं बल्कि दशकों लगते हैं। इसके विपरीत नए पौधे लगाकर पुराने पेड़ की भरपाई तत्काल संभव नहीं है। बरगद जैसे वृक्ष न केवल छाया देते हैं, बल्कि पक्षियों और छोटे जीव-जंतुओं के लिए आश्रय भी उपलब्ध कराते हैं तथा शहर के पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

वन विभाग को जानकारी है या नहीं, जांच जरूरी

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि पेड़ की कटाई के संबंध में वन विभाग को जानकारी है या नहीं। हालांकि इस संबंध में संबंधित विभाग की ओर से अभी कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर वस्तुस्थिति की जांच करें।

यदि पेड़ काटने के लिए नियमानुसार अनुमति ली गई है तो संबंधित अनुमति की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। वहीं यदि बिना अनुमति के पेड़ काटा जा रहा है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

नगर में पेड़ों की कटाई पर बने स्पष्ट नियम और निगरानी

गौ सेवक अनुराग दुबे ने कहा कि शहर में विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन भी उतना ही जरूरी है। नागरिकों का कहना है कि सड़क, चौपाटी, नाली, भवन या अन्य निर्माण कार्यों के लिए यदि किसी पेड़ को हटाना जरूरी हो तो पहले वैकल्पिक व्यवस्था तलाशनी चाहिए। अत्यंत आवश्यक स्थिति में ही पेड़ हटाने की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए और उसके बदले पर्याप्त संख्या में बड़े पौधों का रोपण एवं उनका संरक्षण सुनिश्चित होना चाहिए।

बैकुंठपुर के बाई सागर पारा क्षेत्र में पुराने बरगद की कथित कटाई का मामला अब केवल एक पेड़ काटे जाने तक सीमित नहीं रह गया है। यह सवाल पर्यावरण संरक्षण के सरकारी दावों और जमीन पर हो रही कार्रवाई के बीच अंतर को लेकर भी खड़ा हो गया है।

अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग क्या करता है

हरेली के दिन सामने आए इस मामले में अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन और वन विभाग की कार्रवाई पर है। क्या संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर जांच करेंगे? क्या पेड़ काटने की अनुमति ली गई थी? यदि अनुमति ली गई थी तो किस विभाग ने दी? और यदि अनुमति नहीं ली गई थी तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी?

इन सवालों के जवाब प्रशासन की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे। फिलहाल शहरवासियों की मांग है कि वर्षों पुराने पेड़ की कटाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।हरेली का संदेश साफ है—हरियाली बचाइए, पेड़ लगाइए और पेड़ों को बचाइए। लेकिन बैकुंठपुर में हरेली के दिन ही हरे-भरे बरगद पर चलती आरी इस संदेश पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

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