कलम से …
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“परेशानी को प्रोफेशनलिज़्म समझने की भूल” …आधुनिक कॉर्पोरेट संस्कृति में “प्रोफेशनल” शब्द का प्रयोग प्रायः दक्षता, समयबद्धता और अनुशासन के संदर्भ में किन्तु ….पढ़ें पूरी आलेख डॉ. संजय की कलम से
डॉ. संजय कुमार यादव, सहायक प्रोफेसर (डिजिटल विपणन एवं उपभोक्ता मनोविज्ञान), सर पद्मपत सिंघानिया विश्वविद्यालय आधुनिक कॉर्पोरेट…
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बाजारवाद ने लोकतंत्र को बाजार में खड़ा कर दिया ? ….सरकारों की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी होनी चाहिए.. पर कोई विचार विमर्श नहीं होती ……पढ़े पूरी आलेख इनकी कलम से
कला, संस्कृति, साहित्य,सभ्यता,नैतिक मूल्य,आदर्श, रिश्ते, भावनाएं यहां तक की मनुष्य पूंजीवाद में सब कुछ बिकाऊ होता है।सबकुछ आकर्षक एवं…
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खबर हट के
रायगढ़ की माटी और अस्मिता से जुड़ा एक नाम है ओपी चौधरी …..रायगढ़ विधानसभा से बतौर भाजपा प्रत्याशी की घोषणा के बाद …वरिष्ठ नेता मुकेश जैन की कलम से …. जाने भाजपा प्रत्याशी के जीवन सफर और उनसे जुड़ी रोचक बातें
रायगढ़ ( सितम्बर)। यूथ आईकॉन एवं बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी , पूर्व कलेक्टर ओ.पी.चौधरी को भारतीय जनता पार्टी ने…
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