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आखिर किसने चुरा लिया है मेरे देश का चाँद…..जो आज झोपड़ियों के चूल्हों के साथ बुझ गया है…. झोपड़ियों में खामोशी चेहरे पर उदासी …. पढ़ें एक मार्मिक कविता …. लेखक विश्लेषक कामरेड कि झकझोर देने वाली कविता…. इंसानियत की तलाश में एक मार्मिक पुकार…..
21 hours ago




